


भागलपुर। भागलपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दौरान श्रद्धालुओं को राजा परीक्षित के जन्म की दिव्य कथा सुनाई गई, जिसने उपस्थित भक्तों को आस्था और आध्यात्मिक भाव से सराबोर कर दिया। कथा वाचन के दौरान बताया गया कि राजा परीक्षित का जन्म भारतीय धार्मिक इतिहास की अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक घटनाओं में से एक माना जाता है।
कथावाचक ने बताया कि महाभारत युद्ध के बाद पांडव वंश संकट में पड़ गया था। इसी दौरान अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को नष्ट करने के उद्देश्य से अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने अपने दिव्य सुदर्शन चक्र से गर्भ की रक्षा करते हुए शिशु को जीवनदान दिया। यही बालक आगे चलकर राजा परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध हुए।
‘परीक्षित’ नाम का अर्थ ‘परीक्षा लेने वाला’ बताया गया। मान्यता है कि गर्भ में ही भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप का दर्शन करने के कारण जन्म के बाद राजा परीक्षित प्रत्येक व्यक्ति में भगवान के स्वरूप को खोजने का प्रयास करते थे, जिसके कारण उनका यह नाम पड़ा।
कथा के दौरान राजा परीक्षित के आदर्श शासन, धर्म पालन, न्यायप्रियता और सत्यनिष्ठ जीवन पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि उनके शासनकाल में प्रजा सुखी एवं संतुष्ट थी और उनका जीवन मानव समाज को धर्म, आस्था और सदाचार का संदेश देता है।
कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन समिति ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से समाज में धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से आरती में भाग लिया तथा क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।













