


नवगछिया पुलिस जिला अंतर्गत कदवा थाना क्षेत्र के खैरपुर कदवा स्थित पूरब टोला (वार्ड संख्या-3) में बुधवार की सुबह एक हृदयविदारक हादसा हो गया। शौचालय की टंकी (सेप्टिक टैंक) की सेंटरिंग खोलने के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे ज्वाला यादव के घर शौचालय टंकी से संबंधित निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान मजदूर टैंक के अंदर उतरे थे। आशंका जताई जा रही है कि टैंक के भीतर पहले से जमा जहरीली गैस के कारण एक मजदूर की अचानक तबीयत बिगड़ी और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। उसे बचाने के प्रयास में अन्य दो मजदूर भी एक-एक कर टैंक में उतरे, लेकिन वे भी गैस की चपेट में आ गए और तीनों का दम घुट गया।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए टैंक की दीवार तोड़कर किसी तरह तीनों मजदूरों को बाहर निकाला। आनन-फानन में उन्हें अनुमंडल अस्पताल नवगछिया ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।
मृतकों की पहचान कदवा थाना क्षेत्र के कदवा लक्ष्मीनिया टोला निवासी श्रीलाल मंडल (उम्र 40 वर्ष, पिता स्वर्गीय कल्लर मंडल), कदवा चायटोला निवासी बमबम मंडल (उम्र 45 वर्ष, पिता अक्षय लाल मंडल) तथा जयनंदन मंडल (उम्र 30 वर्ष, पिता पुरण मंडल) के रूप में हुई है। तीनों मजदूर मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे।
घटना की सूचना मिलते ही कदवा थाना, ढोलबज्जा एवं नवगछिया थाना सहित कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी कर शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडल अस्पताल नवगछिया भेज दिया। अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
इस दौरान नवगछिया प्रखंड विकास पदाधिकारी, जिला परिषद अध्यक्ष विपिन मंडल भी अस्पताल पहुंचे और शोक संतप्त परिजनों को ढांढस बंधाया।
कदवा थानाध्यक्ष विक्रम कुमार ने बताया कि शौचालय टैंक की सेंटरिंग खोलने के दौरान दम घुटने से तीन मजदूरों की मौत हुई है। तीनों मृतक स्थानीय निवासी थे। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। परिजनों की ओर से आवेदन प्राप्त होने के बाद आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर सेप्टिक टैंक जैसे बंद स्थानों में बिना सुरक्षा उपायों के काम करने के खतरों को उजागर करती है।
















