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दोहे, चौपाइयों, भजनों, लोकगीतों और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, विद्यार्थियों ने तुलसीदास के साहित्य और श्रीराम के चरित्र को किया जीवंत

नवगछिया। गौशाला रोड स्थित बाल भारती विद्यालय में शनिवार को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास के साथ धूमधाम से मनाई गई। तुलसी जयंती के अवसर पर विद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में भारतीय संस्कृति, साहित्य और संस्कारों की मनमोहक झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने गोस्वामी तुलसीदास की साहित्यिक रचनाओं, भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, रामचरितमानस के प्रसंगों, दोहों, चौपाइयों, कविताओं, भजनों, लोकगीतों एवं नृत्य की विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन बाल भारती विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पवन कुमार सर्राफ, उपाध्यक्ष अजय कुमार रुंगटा एवं सचिव अभय प्रकाश मुनका ने संयुक्त रूप से किया। समारोह में विद्यालय प्रबंधन समिति के संयुक्त सचिव प्रवीण कुमार केजरीवाल, कार्यकारिणी सदस्य दिलीप मुनका, पंकज कुमार टिंबरेवाल, नीरज चिरानिया, श्रीमती पद्मजा रुंगटा, लायंस क्लब के जिला चेयरपर्सन कमलेश अग्रवाल, डॉ. अनंत विक्रम, दोनों विद्यालयों के प्राचार्य नवनीत सिंह एवं कौशल किशोर जायसवाल, प्रशासक डी.पी. सिंह सहित विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

समारोह की शुरुआत तुलसीदास के साहित्य और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों की चर्चा से हुई। कार्यक्रम में बताया गया कि गोस्वामी तुलसीदास ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र को जन-जन तक पहुंचाया। रामचरितमानस ने भारतीय समाज में धर्म, मर्यादा, कर्तव्य, त्याग, सत्य, करुणा, प्रेम और मानवीय मूल्यों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि श्रीराम का चरित्र केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन में आदर्श आचरण और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा भी देता है।

श्रीराम के चरित्र पर विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुति

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने भगवान श्रीराम के जीवन एवं चरित्र से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को गीत, कविता, संवाद और भजनों के माध्यम से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में श्रीराम के आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।

विद्यार्थियों ने तुलसीदास के दोहे एवं रामचरितमानस की चौपाइयों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से विद्यार्थियों ने त्याग, सत्य, संयम, अनुशासन और कर्तव्य पालन का संदेश दिया। मंच पर प्रस्तुतियों के दौरान विद्यालय परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया।

एक दर्जन से अधिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

समारोह में छात्र-छात्राओं द्वारा एक दर्जन से अधिक विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। गीत-संगीत, लोकगीत, श्रीराम से जुड़े विभिन्न भजनों तथा कविताओं की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। विद्यार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत किए गए श्रीराम से जुड़े भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं लोकगीतों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भारतीय परंपरा और लोक संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। उपस्थित अतिथियों एवं विद्यालय परिवार के सदस्यों ने विद्यार्थियों की प्रत्येक प्रस्तुति का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

नृत्य प्रस्तुति ने बांधा समां

समारोह का विशेष आकर्षण नृत्य प्रशिक्षक निवास मोदी द्वारा तैयार एवं प्रशिक्षित छात्र-छात्राओं की नृत्य प्रस्तुति रही। विद्यार्थियों ने शानदार तालमेल, भाव-भंगिमा और मंच अनुशासन के साथ अपनी प्रस्तुति दी। श्रीराम एवं भारतीय संस्कृति से जुड़े भावों को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत कर विद्यार्थियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

प्रस्तुति के दौरान विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। विद्यार्थियों की मेहनत और प्रशिक्षक निवास मोदी के मार्गदर्शन की अतिथियों ने सराहना की।

मारवाड़ी युवा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष का हुआ स्वागत

कार्यक्रम में मारवाड़ी युवा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी पहुंचे। उनके विद्यालय पहुंचने पर मारवाड़ी युवा मंच नवगछिया एवं बाल भारती विद्यालय प्रशासन की ओर से स्वागत किया गया। इस दौरान विद्यालय परिवार के सदस्यों ने उनका अभिनंदन किया। उनके कार्यक्रम में पहुंचने से समारोह की गरिमा और बढ़ गई।

अध्यक्ष पवन कुमार सर्राफ ने कहा—संस्कार के बिना शिक्षा अधूरी

बाल भारती विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पवन कुमार सर्राफ ने कहा कि विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षा के साथ संस्कार और संस्कृति का भी विशेष महत्व है। विद्यालय में ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन का उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति और महान साहित्यकारों की रचनाओं से परिचित कराना है। तुलसीदास ने रामचरितमानस के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र को जिस तरह समाज के सामने रखा, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने, अपने कर्तव्य का पालन करने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। बच्चों को इन आदर्शों से जोड़ना विद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों ने जिस आत्मविश्वास के साथ कार्यक्रम प्रस्तुत किया, वह सराहनीय है।

उपाध्यक्ष अजय कुमार रुंगटा ने कहा—ऐसे आयोजन बच्चों की प्रतिभा को देते हैं मंच

विद्यालय प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष अजय कुमार रुंगटा ने कहा कि विद्यालय में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मंच पर प्रस्तुति देने से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और उनकी प्रतिभा सामने आती है।

उन्होंने कहा कि तुलसी जयंती केवल एक जयंती मनाने का अवसर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय साहित्य, संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने का माध्यम है। तुलसीदास की रचनाओं में जीवन के हर क्षेत्र के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलता है। बच्चों द्वारा श्रीराम के चरित्र को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सामने रखना अत्यंत सराहनीय प्रयास है।

सचिव अभय प्रकाश मुनका ने कहा—तुलसीदास की रचनाएं हमारी अमूल्य धरोहर

विद्यालय प्रबंधन समिति के सचिव अभय प्रकाश मुनका ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास भारतीय साहित्य के महान रचनाकारों में से एक हैं। उनकी रचनाओं ने समाज को श्रीराम के आदर्श चरित्र से परिचित कराया और जीवन में मर्यादा एवं कर्तव्य का महत्व समझाया।

उन्होंने कहा कि आज के बदलते समय में बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति और परंपरा से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। रामचरितमानस में वर्णित श्रीराम का जीवन विद्यार्थियों को अनुशासन, त्याग, सत्य, सेवा, सम्मान और कर्तव्य की प्रेरणा देता है। विद्यालय में तुलसी जयंती के आयोजन का उद्देश्य इसी संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

संयुक्त सचिव प्रवीण कुमार केजरीवाल ने की विद्यार्थियों की सराहना

विद्यालय प्रबंधन समिति के संयुक्त सचिव प्रवीण कुमार केजरीवाल ने कहा कि छात्र-छात्राओं ने जिस उत्साह और अनुशासन के साथ कार्यक्रम में भाग लिया, वह विद्यालय के लिए गौरव की बात है। सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों की प्रतिभा को पहचानने और उसे निखारने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा तुलसीदास के दोहे, श्रीराम से जुड़े भजन, लोकगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति यह दर्शाती है कि बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। उन्हें उचित मंच और मार्गदर्शन मिलने की आवश्यकता है।

प्राचार्य नवनीत सिंह ने कहा—शिक्षा के साथ संस्कार जरूरी

विद्यालय के प्राचार्य नवनीत सिंह ने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें संस्कारवान, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना भी है। भारतीय संस्कृति और साहित्य से जुड़े कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि तुलसीदास की रचनाओं में जीवन के अनेक पहलुओं का मार्गदर्शन मिलता है। भगवान श्रीराम का चरित्र विद्यार्थियों को सत्य, अनुशासन, त्याग और कर्तव्य की प्रेरणा देता है। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने जिस तरह से कार्यक्रम में भाग लिया, वह उनके आत्मविश्वास और प्रतिभा को दर्शाता है।

प्राचार्य कौशल किशोर जायसवाल ने कहा—श्रीराम का चरित्र सदैव प्रेरणादायी

प्राचार्य कौशल किशोर जायसवाल ने कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र भारतीय समाज में आदर्श जीवन का प्रतीक माना जाता है। उनके जीवन में माता-पिता के प्रति सम्मान, गुरु के प्रति श्रद्धा, भाई के प्रति प्रेम, प्रजा के प्रति जिम्मेदारी और सत्य के प्रति दृढ़ता दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसे आदर्श चरित्रों से परिचित कराना उनके नैतिक विकास के लिए आवश्यक है। तुलसीदास ने श्रीराम के आदर्शों को जिस सरल और प्रभावी रूप में जन-जन तक पहुंचाया, वह भारतीय साहित्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम इसी समृद्ध परंपरा की एक सुंदर झलक रहा।

प्रशासक डी.पी. सिंह ने जताया आभार

विद्यालय के प्रशासक डी.पी. सिंह ने कार्यक्रम की सफलता के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति, प्राचार्यों, शिक्षकों, शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर मेहनत की।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से न केवल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि भारतीय संस्कृति और तुलसीदास के साहित्य के प्रति अपनी समझ भी प्रस्तुत की। इस प्रकार के आयोजन भविष्य में भी विद्यालय में निरंतर आयोजित किए जाएंगे, ताकि बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कृति एवं संस्कारों से जोड़ा जा सके।

कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यार्थियों को मंच प्रस्तुति के लिए तैयार करने से लेकर कार्यक्रम के संचालन एवं व्यवस्थाओं तक विद्यालय परिवार के सदस्यों ने सक्रिय सहयोग किया।

तुलसी जयंती के अवसर पर आयोजित यह समारोह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय साहित्य, संस्कृति, संस्कार और भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बना। दोहे, चौपाइयां, कविताएं, भजन, लोकगीत और नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने तुलसीदास की साहित्यिक विरासत और श्रीराम के आदर्शों को जिस जीवंतता के साथ मंच पर उतारा, उससे पूरा विद्यालय परिसर भक्तिमय एवं सांस्कृतिक रंग में रंग गया।

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