5
(2)

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के बंद होने के बाद पूर्व बिहार की लाइफ लाइन कही जाने वाली गंगा पार की जल यात्रा पर यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। त्योहारी मौसम में गंगा के आर-पार आवागमन करने वाले लोगों की संख्या बढ़ने से घाटों पर भीड़ बढ़ गई है। सीमित संसाधनों के बीच यात्रियों की बढ़ती संख्या प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए चुनौती बनती जा रही है। गंगा पार करने की जद्दोजहद में यात्रियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

CREATOR: gd-jpeg v1.0 (using IJG JPEG v62), default quality?

सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को हो रही है, जो अपने साथ भारी सामान लेकर गंगा पार करने पहुंच रहे हैं। घाट पर उतरने के बाद सामान लेकर जहाज तक पहुंचना आसान नहीं है। कई यात्रियों को पानी और कीचड़ से होकर आगे बढ़ना पड़ता है। भारी सामान उठाकर जहाज तक पहुंचने में यात्रियों के पसीने छूट रहे हैं। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है।

बढ़ती भीड़ के सामने सीमित इंतजाम:

विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद सड़क मार्ग से होने वाला आवागमन प्रभावित हुआ है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग जल मार्ग का सहारा ले रहे हैं। त्योहारों के दौरान घर लौटने और आवश्यक कार्यों से गंगा के आर-पार जाने वालों की संख्या में और इजाफा हुआ है। नतीजतन घाटों पर यात्रियों की कतार और भीड़ देखने को मिल रही है।

यात्रियों का कहना है कि बढ़ती भीड़ के मुकाबले उपलब्ध सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। घाट पर बैठने, सामान लेकर आगे बढ़ने और जहाज तक पहुंचने की व्यवस्था को लेकर यात्रियों को कठिनाई हो रही है। प्रशासन की ओर से किए जा रहे इंतजाम बढ़ते यात्री दबाव के सामने सीमित साबित हो रहे हैं। यात्रियों की संख्या को देखते हुए मौजूदा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

भूख के बीच ‘जीविका दीदी की रसोई’ बनी सहारा:

इस परेशानी के बीच बियाडा घाट पर जीविका दीदी की रसोई यात्रियों के लिए राहत का माध्यम बनी हुई है। अक्टूबर से लगातार संचालित इस रसोई में यात्रियों को महज 70 रुपये में सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

गंगा पार करने के इंतजार में घंटों घाट पर रहने वाले यात्रियों के लिए भोजन की यह व्यवस्था काफी उपयोगी साबित हो रही है। दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को घाट पर ही किफायती दर पर भोजन मिल जाने से उन्हें कुछ राहत मिल रही है। खासकर परिवार के साथ यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था सुविधाजनक है।

घंटों इंतजार के बीच भोजन की सुविधा:

विक्रमशिला सेतु बंद होने के कारण जल मार्ग पर बढ़े दबाव का असर यात्रियों के इंतजार के समय पर भी पड़ रहा है। जहाज की उपलब्धता और यात्रियों की भीड़ के बीच कई लोगों को घाट पर काफी समय बिताना पड़ रहा है। ऐसे में बियाडा घाट की रसोई यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हो रही है।

हालांकि, यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए केवल भोजन की व्यवस्था से पूरी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। गंगा पार करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए घाट तक पहुंच, यात्रियों के चढ़ने-उतरने, भारी सामान के परिवहन और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था को भी बेहतर करना जरूरी है।

त्योहारी मौसम में गंगा पार करने वाले यात्रियों की संख्या और बढ़ने की संभावना के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित जल यात्रा सुनिश्चित करने की है। फिलहाल, बियाडा घाट की जीविका रसोई भूख से परेशान यात्रियों को जरूर राहत दे रही है, लेकिन बढ़ते यात्री दबाव के मुकाबले व्यापक यात्री सुविधाओं की जरूरत अब पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।

Aapko Yah News Kaise Laga.

Click on a star to rate it!

Average rating 5 / 5. Vote count: 2

No votes so far! Be the first to rate this post.

Share: