


क्षमता से अधिक सवारी ढो रहीं नावें, बड़े हादसे की आशंका गहराई
नवगछिया : विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर, नवगछिया एवं सीमांचल के कई इलाकों के बीच सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हो गया है। ऐसे में गंगा पार करने के लिए नाव ही लोगों का मुख्य सहारा बन गई है। लेकिन घाटों पर बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था अब यात्रियों के लिए नई मुसीबत बनती जा रही है।

महादेवपुर घाट से बरारी घाट तथा तिनटंगा करारी घाट से कहलगांव के बीच इन दिनों यात्रियों की भारी आवाजाही हो रही है। सुबह और शाम के समय घाटों पर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। खासकर नौकरीपेशा लोग, छात्र, मरीज, किसान और व्यवसायी बड़ी संख्या में नावों के सहारे गंगा पार कर रहे हैं।
सबसे अधिक दबाव महादेवपुर घाट पर देखा जा रहा है। यहां नाविकों के बीच अधिक चक्कर लगाने और ज्यादा सवारी बैठाने की होड़ मची हुई है। प्रशासन के सख्त निर्देशों के बावजूद कई नावों पर क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जल्दबाजी में यात्रियों को चढ़ाने और उतारने के दौरान कई बार नावों का संतुलन भी बिगड़ जाता है, जिससे बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है। घाट पर मौजूद लोग बताते हैं कि नाविक एक-दूसरे की सवारी भी अपनी नाव पर बैठाने की कोशिश करते नजर आते हैं, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बना रहता है।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल, आपदा मित्र और प्रशासनिक अधिकारी लगातार तैनात हैं, लेकिन यात्रियों की बढ़ती संख्या के कारण व्यवस्था संभालना चुनौती बन गया है। बावजूद इसके घाटों पर अव्यवस्था कम होने का नाम नहीं ले रही।
सुबह और शाम के समय स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। सरकारी एवं निजी कार्यालयों में काम करने वाले लोग समय पर पहुंचने की जल्दी में घाटों पर भारी भीड़ लगा देते हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। कई लोग जान जोखिम में डालकर नावों में सफर करने को मजबूर हैं।
वहीं सब्जी विक्रेताओं, किसानों और मरीजों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने और माल ढुलाई प्रभावित होने से लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से घाटों पर अतिरिक्त नावों की व्यवस्था, सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन और यात्रियों के लिए बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
















