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‘सृजनात्मक पाठशाला’ के जरिए जरूरतमंद विद्यार्थियों को मिल रही छात्रवृत्ति और नई उम्मीद

पूर्णिया : आज के दौर में जहां सोशल मीडिया का उपयोग अधिकतर मनोरंजन और सामान्य बातचीत तक सीमित होकर रह गया है, वहीं पूर्णिया में व्हाट्सएप के जरिए शुरू की गई एक अनोखी पहल गरीब और जरूरतमंद छात्र-छात्राओं के जीवन में नई रोशनी ला रही है। ‘सृजनात्मक पाठशाला’ नामक यह मंच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है।


इस सामाजिक और शैक्षणिक पहल के संस्थापक पूर्णिया विश्वविद्यालय के अंतर्गत एक सरकारी कॉलेज में कार्यरत शिक्षक डॉ. विवेका नंद सिंह हैं, जिन्हें छात्र आदरपूर्वक डॉ. वी.एन. सिंह के नाम से जानते हैं।

आर्थिक तंगी से जूझते छात्रों के लिए शुरू हुई पहल

डॉ. वी.एन. सिंह ने बताया कि वर्ष 2017 में उन्होंने अर्थशास्त्र विषय के इंटर, स्नातक और पीजी के विद्यार्थियों के लिए ‘सृजनात्मक पाठशाला’ की शुरुआत की थी। अध्यापन के दौरान उन्होंने महसूस किया कि कई प्रतिभाशाली छात्र आर्थिक अभाव के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पाते।



इसी पीड़ा ने उन्हें इस दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने मित्रों, परिचितों और पूर्व छात्रों से सहयोग की अपील की, जिसके बाद “दानवीर और ज्ञानवीर” की अनूठी परंपरा शुरू हुई।

क्या है ‘दानवीर-ज्ञानवीर’ मॉडल

इस पहल में करीब 24 लोग “दानवीर” के रूप में जुड़े हुए हैं, जो हर महीने अपनी आय का एक हिस्सा फंड में जमा करते हैं। इसी फंड से जरूरतमंद छात्र-छात्राओं, जिन्हें “ज्ञानवीर” कहा जाता है, को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रतिमाह 1500 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है।


चयन प्रक्रिया में सामाजिक संतुलन और सभी वर्गों की भागीदारी का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि हर जरूरतमंद छात्र को अवसर मिल सके।

डॉ. सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया की दुनिया में यह अपने तरह की अनोखी पहल है, जिसने वर्ष 2021 से ही प्रतियोगी छात्रों के लिए ‘ज्ञानवीर’ जैसी सुविधा शुरू कर दी थी।

चार वर्षों में करीब पांच लाख की छात्रवृत्ति


‘सृजनात्मक पाठशाला’ अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। पिछले चार वर्षों में इस मंच के माध्यम से कुल 4 लाख 92 हजार रुपये की छात्रवृत्ति जरूरतमंद छात्रों तक पहुंचाई जा चुकी है।

वर्ष 2022 में पांच विद्यार्थियों को 1 लाख 8 हजार रुपये, वर्ष 2023 में सात विद्यार्थियों को 1 लाख 8 हजार रुपये, वर्ष 2024 में आठ विद्यार्थियों को 1 लाख 32 हजार रुपये तथा वर्ष 2025 में आठ विद्यार्थियों को 1 लाख 44 हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी गई।

मदद पाने वाले छात्र ही बने सहयोगी

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि यहां से मदद पाकर नौकरी हासिल करने वाले कई छात्र अब खुद “दानवीर” बन चुके हैं। वर्तमान में 12 ऐसे लोग इस अभियान से जुड़े हैं, जो कभी इसी पाठशाला के “ज्ञानवीर” हुआ करते थे।


शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी

‘सृजनात्मक पाठशाला’ केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है। इस मंच के माध्यम से समय-समय पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है और विजेताओं को सम्मानित किया जाता है। इसके अलावा सर्दियों में गरीब रिक्शा चालकों के बीच कंबल वितरण जैसे सामाजिक कार्य भी किए जाते हैं।

डॉ. वी.एन. सिंह और उनके सहयोगियों की यह पहल आज पूर्णिया सहित आसपास के क्षेत्रों में प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के सपनों को सहारा देने वाली यह मुहिम शिक्षा और समाज सेवा का एक अनूठा उदाहरण बनकर उभर रही है।

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