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भागलपुर में आयोजित बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समारोह के दौरान उत्तर प्रदेश के गोंडा से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने आजादी की लड़ाई और भारतीय संविधान को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिससे नई बहस छिड़ गई है।

अपने संबोधन में उन्होंने प्रसिद्ध गीत “साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल” का जिक्र करते हुए कहा कि केवल महात्मा गांधी को आजादी का पूरा श्रेय देना उन हजारों क्रांतिकारियों के बलिदान के साथ न्याय नहीं है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, वीर कुंवर सिंह, बिरसा मुंडा और देवी बख्श सिंह जैसे वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान हस्तियों को इतिहास में उनका उचित स्थान नहीं मिल पाया है।

बृजभूषण शरण सिंह ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों “जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध” का हवाला देते हुए कहा कि समाज ने लंबे समय तक क्रांतिकारियों के योगदान पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।

संविधान निर्माण के विषय में उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ-साथ संविधान सभा के 242 अन्य विद्वान सदस्यों ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने विशेष रूप से बिहार के प्रतिनिधियों के योगदान को उल्लेखनीय बताते हुए इतिहास को संतुलित दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उनके इस बयान के बाद आजादी के इतिहास और संविधान निर्माण को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

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