


बाल सुधार गृह में बच्चों को कला, संस्कृति और राष्ट्रभावना से जोड़ने की पहल
पूर्णिया : संस्कार भारती पूर्णिया इकाई द्वारा आयोजित छह दिवसीय निःशुल्क कार्यशाला का शुभारंभ पूर्णिया जिला बाल सुधार गृह में दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों को कला, संगीत और संस्कृति के माध्यम से भारतीय संस्कारों एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ना है।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संस्कार भारती की जिलाध्यक्ष श्रीमती पल्लवी मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष उदय कुमार सिंह, बाल सुधार गृह के सुपरिंटेंडेंट धर्मेंद्र कुमार, संगीत गुरु एवं मंचीय कला विभाग संयोजक विजय दास तथा वरिष्ठ नृत्य गुरु जयदीप मुखर्जी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने संस्कार भारती के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्था कला, साहित्य, संस्कृति और नाटक के माध्यम से भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और नैतिक मूल्यों के संरक्षण का कार्य कर रही है। बताया गया कि संस्कार भारती की पूर्णिया इकाई पिछले लगभग पांच वर्षों से सक्रिय है तथा लगातार चार वर्षों से बच्चों के लिए निःशुल्क कार्यशालाओं का आयोजन कर रही है।

संस्कार भारती की महामंत्री कुमारी चांदनी शुक्ला ने कहा कि वर्ष 2026 की यह पहली कार्यशाला विशेष रूप से उन बच्चों के लिए आयोजित की गई है, जो किसी कारणवश समाज की मुख्यधारा से भटक गए हैं। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति के माध्यम से बच्चों के भीतर सकारात्मक सोच, राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही संगीत और नृत्य के जरिए उन्हें मानसिक शांति और आत्मविश्वास भी मिलेगा।
प्रदेश मंचीय कला विभाग संयोजक अमित कुमार ने बच्चों को राष्ट्रवादी भावना से जुड़ने और अपनी प्रतिभा को सकारात्मक दिशा देने के लिए प्रेरित किया। वहीं जिलाध्यक्ष पल्लवी मिश्रा ने संस्था की ओर से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए निरंतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।

यह कार्यशाला 18 मई से 23 मई तक चलेगी। इसमें विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा दिया जाएगा। संगीत प्रशिक्षण कुमारी चांदनी शुक्ला, शास्त्रीय नृत्य (भरतनाट्यम) का प्रशिक्षण जिला मंत्री सूरज साहनी तथा लोक नृत्य का प्रशिक्षण अमित कुमार देंगे।
कार्यक्रम का संचालन जिला मंत्री सूरज साहनी ने किया। उन्होंने बताया कि संस्कार भारती सामाजिक परिवर्तन के पांच प्रमुख आयाम—सशक्त परिवार, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवन शैली और नागरिक कर्तव्य—पर लगातार कार्य कर रही है। संस्था कला और संस्कृति के संरक्षण के साथ एक संस्कारित समाज निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
















