


पूर्णिया । पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार की परीक्षा व्यवस्था और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल सजा का प्रावधान बढ़ाने से पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक नहीं लगेगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, ऑडिट और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

सांसद ने कहा कि वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच एनटीए ने करीब ₹3,554 करोड़ की आय अर्जित की, लेकिन उसकी कार्यप्रणाली और वित्तीय जवाबदेही पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरटीआई और स्वतंत्र ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के बजाय कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी किसी व्यवस्था की सफलता के लिए जवाबदेही को सबसे महत्वपूर्ण माना था।
पप्पू यादव ने कहा कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी हर वर्ष करोड़ों छात्रों की परीक्षाएं आयोजित करती है, लेकिन उसके संसाधन और प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर सवाल हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों का सबसे अधिक नुकसान मेहनत करने वाले छात्रों को उठाना पड़ता है, जिससे उनका भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
उन्होंने सरकार से पूछा कि करोड़ों छात्रों से आवेदन शुल्क के रूप में प्राप्त राशि का उपयोग किस प्रकार किया जाता है और जांच एजेंसियों की जवाबदेही कौन तय करेगा। उनका कहना था कि केवल छोटे आरोपियों पर कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में संस्थागत सुधार आवश्यक हैं।
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान पप्पू यादव ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए अमेरिका, दक्षिण कोरिया, चीन, फिनलैंड, ब्रिटेन और सिंगापुर की परीक्षा प्रणालियों के कुछ मॉडल अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कंप्यूटर आधारित अनुकूली परीक्षा, फेस रिकग्निशन, ब्लॉकचेन आधारित डिजिटल सुरक्षा, स्वतंत्र राष्ट्रीय परीक्षा सुरक्षा बोर्ड के गठन तथा निजी परीक्षा केंद्रों की जगह सरकारी संस्थानों में परीक्षाएं आयोजित करने की मांग की।
अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि मौजूदा संशोधन विधेयक में छात्रों की सुरक्षा, एनटीए की जवाबदेही, ऑडिट और आरटीआई जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी की गई है। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार कर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
















