


‘
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के छह वर्ष पूरे होने के अवसर पर तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर गांधी विचार विभाग में गुरुवार को ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के 6 वर्ष : चुनौतियां और उपलब्धियां’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में शिक्षा नीति की उपलब्धियों, चुनौतियों और भारतीय शिक्षा व्यवस्था के भविष्य पर गंभीर विमर्श हुआ।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. अमित रंजन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विकसित भारत की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना भी है जो संस्कारवान, सामाजिक रूप से जिम्मेदार और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें। उन्होंने शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों से नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में सहभागी बनने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता के रूप में विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं गांधीवादी चिंतक प्रो. (डॉ.) विजय कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान परंपरा, कौशल विकास और मूल्यपरक शिक्षा को नई दिशा देने वाली ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि गांधीजी की ‘नई तालीम’, स्वावलंबन, श्रम की प्रतिष्ठा और नैतिक मूल्यों को व्यवहार में उतारकर ही शिक्षा नीति के वास्तविक उद्देश्यों को साकार किया जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. उमेश प्रसाद नीरज ने किया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समकालीन प्रासंगिकता, बदलते शैक्षणिक परिदृश्य और भारतीय शिक्षा व्यवस्था में आ रहे व्यापक बदलावों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
संगोष्ठी के अंत में डॉ. मनोज कुमार दास ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक डॉ. गौतम कुमार, डॉ. देशराज वर्मा, डॉ. सीमा कुमारी, जेआरएफ गौरव कुमार मिश्रा, सागर शर्मा, नीरज कुमार निर्मल, शहादत हुसैन सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और भारतीय शिक्षा को अधिक समावेशी, कौशल-आधारित एवं मूल्यपरक बनाने पर विशेष बल दिया गया।
















