


कुलपति को आवेदन सौंपकर पाठ्यक्रम पुनः शुरू करने की मांग, छात्र नेता पीयूष पुजारा ने कहा—मामला सीधे छात्रों के भविष्य से जुड़ा
पूर्णिया। पूर्णिया विश्वविद्यालय में क्लिनिकल न्यूट्रिशन एंड डाइटीटिक्स पाठ्यक्रम को लेकर छात्रों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। पाठ्यक्रम से जुड़े छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति को लिखित आवेदन सौंपकर इसे पुनः शुरू करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि यह पाठ्यक्रम उनके करियर, रोजगार और भविष्य से सीधे जुड़ा है। ऐसे में इसे बंद करना अथवा अनिश्चित स्थिति में रखना उनके हितों के खिलाफ है।

छात्रों ने आवेदन में बताया कि क्लिनिकल न्यूट्रिशन एंड डाइटीटिक्स एक व्यावसायिक (वोकेशनल) पाठ्यक्रम है, जिसका संबंध स्वास्थ्य सेवाओं से है। वर्तमान समय में इस क्षेत्र की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। अस्पतालों, क्लीनिकों, स्वास्थ्य संस्थानों और फिटनेस क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की मांग बढ़ रही है। ऐसे में छात्रों के अनुसार, इस पाठ्यक्रम को जारी रखना उनके साथ-साथ समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है।
आवेदन में छात्रों ने कहा कि उन्होंने इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेकर अपने भविष्य को ध्यान में रखते हुए समय, मेहनत और आर्थिक संसाधनों का निवेश किया है। ऐसे में पाठ्यक्रम को बीच में रोक देना या इसे अनिश्चित स्थिति में डाल देना उनके भविष्य को प्रभावित कर सकता है। छात्रों का कहना है कि इससे उनके रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे और उनके परिवारों की उम्मीदों पर भी असर पड़ेगा।

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले में जल्द सकारात्मक निर्णय लेने तथा पाठ्यक्रम को पुनः सुचारू रूप से संचालित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनके करियर को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
इस मामले को लेकर छात्र नेता पीयूष पुजारा ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि क्लिनिकल न्यूट्रिशन एंड डाइटीटिक्स जैसे महत्वपूर्ण और रोजगारपरक पाठ्यक्रम को बंद करना या इसे लेकर अनिश्चितता बनाए रखना उचित नहीं है। यह सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों की भावनाओं और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम को जल्द पुनः शुरू करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपनी मेहनत और संसाधनों का निवेश इस पाठ्यक्रम में किया है। ऐसे में उन्हें स्पष्ट और सकारात्मक दिशा मिलनी चाहिए।
छात्रों ने उम्मीद जताई है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द ठोस निर्णय करेगा और उन्हें राहत मिलेगी। फिलहाल छात्रों की नजरें विश्वविद्यालय प्रशासन के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।
















