


@ इस घटना ने कुछ दिन पहले हुए नाव हादसे की याद फिर ताजा कर दी। उस घटना में भी नाव इसी तरह गंगा के भंवर में फंसकर नदी में समा गई थी। नाव पर 21 मजदूर सवार थे। हादसे में दो मजदूरों की दबने से मौत हो गई थी।नाव पर सवार मजदूरों के बिना सुरक्षा जैकेट होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल यह है कि पिछली दुर्घटना के बाद भी नाव संचालन में सुरक्षा मानकों को लेकर लापरवाही क्यों जारी है?
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। राघोपुर में गंगा ने एक बार फिर अपना खतरनाक रूप दिखाया। मजदूरों से भरी एक नाव अचानक बीच भंवर में फंस गई। नाव पर करीब 900 बोरी बालू लदी थी और नौ मजदूर सवार थे। कुछ पल की देरी भी बड़ा हादसा कर सकती थी, लेकिन SDRF और NDRF की टीम ने स्थिति को भांपते हुए तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। टीम की तत्परता से नाव पर सवार सभी नौ मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना राघोपुर की बताई जा रही है, जहां पिछले कई दिनों से ध्वस्त तटबंध की मरम्मत जियो बैग के सहारे की जा रही है।

नाव के भंवर में फंसते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। SDRF और NDRF के जवानों ने तत्काल नाव पर मौजूद मजदूरों को सुरक्षा के लिए निर्देश देना शुरू किया। जवानों ने चिल्लाकर मजदूरों से नाव का भार कम करने के लिए बालू की बोरियां गंगा में फेंकने को कहा। निर्देश मिलते ही मजदूरों ने एक-एक कर बालू की बोरियां गंगा में फेंकनी शुरू कर दीं। नाव का भार कम करने के साथ ही बचाव दल ने मोर्चा संभाले रखा और सभी मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया।
रेस्क्यू के बाद मजदूरों ने राहत की सांस ली। कुछ देर पहले जहां जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष चल रहा था, वहीं बचाए जाने के बाद मजदूरों ने चैन की सांस ली और भोजन कर सामान्य होने की कोशिश करते दिखे।
इस घटना ने कुछ दिन पहले हुए नाव हादसे की याद फिर ताजा कर दी। उस घटना में भी नाव इसी तरह गंगा के भंवर में फंसकर नदी में समा गई थी। हादसे में दो मजदूरों की दबने से मौत हो गई थी। उस घटना के बाद नावों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे। आज की घटना में भी नाव पर सवार मजदूरों के बिना सुरक्षा जैकेट होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल यह है कि पिछली दुर्घटना के बाद भी नाव संचालन में सुरक्षा मानकों को लेकर लापरवाही क्यों जारी है?

900 बोरी बालू से लदी नाव, नौ मजदूर और बिना लाइफ जैकेट के सफर – इन तीन तस्वीरों ने गंगा में सुरक्षित नाव परिचालन पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस घटना ने कुछ दिन पहले हुए नाव हादसे की याद फिर ताजा कर दी है। उस समय भी नाव इसी तरह गंगा के भंवर में फंसकर नदी में समा गई थी और दो मजदूरों की दबने से मौत हो गई थी। आज नौ मजदूरों की जान बच गई, लेकिन सवाल वही है – क्या अगली बार भी बचाव दल के पहुंचने तक किस्मत साथ देगी?
















