


@ रूट डायवर्जन से लेकर नाव-क्रूज के किराये तक पर नजर, ओवरलोडिंग हुई तो कार्रवाई तय।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। विक्रमशिला सेतु बंद होने की आहट के साथ ही भागलपुर में प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था की कमान अपने हाथ में ले ली है। सेतु पर मरम्मत और रखरखाव के दौरान सड़क मार्ग प्रभावित हुआ तो लोगों की आवाजाही का बड़ा सहारा गंगा की नाव और क्रूज सेवाएं बन सकती हैं। इसी को देखते हुए प्रशासन ने अभी से रूट, घाट, किराया और सुरक्षा – चारों मोर्चों पर निगरानी का प्लान तैयार किया है।

सबसे अहम बात यह है कि सेतु बंद होने के बाद यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर नाव या क्रूज संचालक मनमाना किराया नहीं वसूल सकेंगे। प्रशासन ने निर्धारित किराया घाटों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर बड़े बोर्ड पर प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है। तय दर से अधिक वसूली की शिकायत मिलने पर संबंधित दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करेंगे।
छह सदस्यीय टीम संभालेगी पूरी व्यवस्था:
जिलाधिकारी के निर्देश पर छह सदस्यीय उच्चस्तरीय निगरानी समिति गठित की गई है। अपर जिला दंडाधिकारी (विधि व्यवस्था) समिति के अध्यक्ष होंगे। अपर समाहर्त्ता (लोक शिकायत निवारण), अपर समाहर्त्ता (आपदा प्रबंधन), सदर एसडीओ, नवगछिया एसडीओ, पुलिस उपाधीक्षक नगर-1 और नवगछिया के एसडीपीओ को समिति में शामिल किया गया है। समिति का काम सिर्फ कागजी योजना बनाना नहीं, बल्कि मौके पर जाकर व्यवस्था की जांच करना होगा।
सड़क पर दबाव बढ़ा तो बदलेगा ट्रैफिक का गणित:
सेतु बंद रहने की स्थिति में वैकल्पिक सड़कों का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। सड़क की चौड़ाई और संभावित यातायात दबाव को देखते हुए वन-वे, भारी वाहनों के डायवर्जन और नो-एंट्री की व्यवस्था तय की जा सकती है।
भागलपुर और नवगछिया दोनों तरफ ऑटो, ई-रिक्शा और दूसरे सवारी वाहनों के लिए अलग ड्रॉपिंग और पिकअप प्वाइंट भी चिन्हित किए जाएंगे। प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि यात्रियों के नदी पार करने से पहले और बाद में सड़क पर अव्यवस्था न पैदा हो।
नाव चलेगी, लेकिन सुरक्षा की कीमत पर नहीं:
गंगा में नाव और क्रूज का परिचालन शुरू करने से पहले सुरक्षा व्यवस्था की तकनीकी जांच होगी। घाटों पर जेटी, अप्रोच रोड, रोशनी और बैरिकेडिंग जैसे इंतजाम देखे जाएंगे। हर नाव और क्रूज पर लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय और अग्निशामक यंत्र की उपलब्धता जरूरी होगी। प्रशिक्षित गोताखोरों की मौजूदगी भी सुनिश्चित करनी होगी। क्षमता से ज्यादा यात्रियों को बैठाने पर रोक रहेगी। यानी सेतु बंद होने के बाद गंगा पार कराने की व्यवस्था तो होगी, लेकिन प्रशासन के निर्देश के मुताबिक सुरक्षा मानकों की जांच के बाद ही नाव या क्रूज को परिचालन की अनुमति मिलेगी।
असली परीक्षा सेतु बंद होने के बाद होगी:
फिलहाल प्रशासन ने व्यवस्था का खाका तैयार कर लिया है। अब चुनौती इसे जमीन पर उतारने की होगी। सेतु बंद होने पर एक साथ बढ़ने वाला सड़क यातायात, घाटों पर यात्रियों की भीड़ और नावों पर बढ़ने वाला दबाव – इन तीनों को संभालना प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा होगी। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और अनुपालन के लिए नगर निगम आयुक्त, उप विकास आयुक्त तथा संबंधित थानों को भी इसकी प्रतियां भेजी गई हैं।

















