


पूर्णिया। बिहार में बाढ़ से उत्पन्न स्थिति को लेकर पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने राज्यपाल से मुलाकात कर कोसी-सीमांचल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष राहत एवं पुनर्वास पैकेज की मांग रखी। उन्होंने पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र समेत कोसी-सीमांचल के प्रभावित परिवारों, किसानों, पशुपालकों और छोटे कारोबारियों के लिए कम से कम 5,000 करोड़ रुपये के विशेष बाढ़ राहत एवं पुनर्वास पैकेज की मांग की।

सांसद ने कहा कि पूर्णिया, अररिया, कटिहार, मधेपुरा और सुपौल समेत कोसी-सीमांचल के कई इलाकों में बाढ़ और कटाव से लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का अलग से केंद्रीय सर्वेक्षण कराने और वास्तविक क्षति के आधार पर सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
फरक्का बैराज और गाद जमाव का मुद्दा उठाया
राज्यपाल के समक्ष पप्पू यादव ने फरक्का बैराज और गंगा नदी में लगातार बढ़ रहे गाद जमाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बाढ़ की समस्या और नदी की जल-वहन क्षमता पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन और दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता बताई।
उन्होंने दिसंबर 2026 में भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की अवधि समाप्त होने से पहले बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध पहल किए जाने की मांग की। सांसद ने कहा कि गंगा जल प्रबंधन में बिहार के हितों और सुरक्षा को भी पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए।
बाढ़ नियंत्रण योजनाओं की जांच की मांग

पप्पू यादव ने बिहार में लंबे समय से संचालित बाढ़ नियंत्रण, तटबंध, कटाव निरोधी, जल निकासी, नहर और लघु सिंचाई योजनाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। उन्होंने वर्ष 1960 से अब तक संचालित योजनाओं और ठेकों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, ठेकेदार और कंपनीवार विवरण तैयार करने तथा अधूरे या कथित रूप से घटिया निर्माण कार्यों की जांच कराने का आग्रह किया।
उन्होंने बाढ़ नियंत्रण कार्यों में सामने आई कथित वित्तीय अनियमितताओं की भी स्वतंत्र जांच की मांग की। सांसद ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय जांच एजेंसी अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता या निगरानी में विशेष जांच दल का गठन किया जा सकता है।
तकनीकी जांच और जवाबदेही की मांग
सांसद ने कोसी, महानंदा और गंगा के संवेदनशील तटबंधों का स्वतंत्र तकनीकी संस्थानों से भौतिक परीक्षण कराने की मांग की। उन्होंने सभी चालू और नए कार्यों से संबंधित ई-निविदा, जियो-टैग तस्वीरें और तृतीय-पक्ष निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करने का भी आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि बाढ़ नियंत्रण पर होने वाले सरकारी खर्च और धरातल पर हुए कार्यों का मिलान कर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
कोसी-सीमांचल के दौरे का आग्रह
पप्पू यादव ने राज्यपाल से कोसी-सीमांचल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने का आग्रह किया। उन्होंने वर्ष 2008 की कोसी बाढ़ का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय व्यापक स्तर पर पुनर्निर्माण और राहत कार्य किए गए थे। उन्होंने वर्तमान बाढ़ की स्थिति में भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई।
उन्होंने किसानों, मछुआरों, पशुपालकों और बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजा, कृषि क्षति की भरपाई, ऋण एवं भू-राजस्व में राहत तथा दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन की मांग रखी।
जल शक्ति मंत्री से भी मिले पप्पू यादव
इसी मुद्दे को लेकर पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से भी मुलाकात की। उन्होंने बिहार में आई भीषण बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की। सांसद ने कहा कि बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर जन-धन की क्षति हुई है और बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंपकर प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए विशेष केंद्रीय सहायता पैकेज स्वीकृत करने का आग्रह किया।
प्रमुख नदियों में बढ़े जलस्तर का दिया हवाला
ज्ञापन में सांसद ने गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा समेत प्रमुख नदियों में बढ़े जलस्तर से राज्य के विभिन्न हिस्सों में उत्पन्न बाढ़ की स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बाढ़ से फसलों को नुकसान हुआ है, मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।
उन्होंने क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण, फसल क्षति की भरपाई, मृतकों के आश्रितों को उचित मुआवजा तथा तटबंधों एवं सार्वजनिक आधारभूत संरचनाओं के स्थायी सुदृढ़ीकरण के लिए विशेष प्रावधान की मांग की।
केंद्रीय टीम भेजकर क्षति आकलन की मांग
पप्पू यादव ने बिहार में केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी दल भेजकर बाढ़ से हुई वास्तविक क्षति का आकलन कराने और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के मानकों के अनुरूप राहत सहायता बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा दल, स्वच्छ पेयजल, पशु चारा और अस्थायी आवास की व्यवस्था करने की भी मांग की।
सांसद ने वर्ष 2008 की कोसी बाढ़ के दौरान मिली केंद्रीय सहायता का उल्लेख करते हुए वर्तमान संकट की व्यापकता को देखते हुए बिहार के लिए विशेष पैकेज पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया।
















