


@ गंगा का जलस्तर 2021 के रिकॉर्ड से 26 सेंटीमीटर नीचे, फिर भी नए इलाकों तक पहुंचा पानी
कर्मा पर्व पर एक ही दिन आठ बच्चों की डूबने से मौत, करीब 19 दिनों में 19 की गई जान।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा का पानी उतरने लगा है, लेकिन बाढ़ की त्रासदी पीछे गहरे निशान छोड़ गई है। पिछले करीब 19 दिनों में बाढ़ के पानी में डूबने से करीब 19 लोगों की मौत हो चुकी है। सोमवार को कर्मा पर्व पर स्नान के दौरान आठ बच्चों की डूबने से मौत ने इस त्रासदी को और भयावह बना दिया। इनमें छह बच्चे सुल्तानगंज और दो नाथनगर में डूबे। पीरपैंती में दो और नवगछिया में भी एक बच्चे डूबे। वहीं नाथनगर में भी दो लापता मासूम का शव पोखर में ही मिला। इस वर्ष डूबने से करीब 27 मौतें हो चुकी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बार गंगा का अधिकतम जलस्तर पिछले वर्षों के बड़े रिकॉर्ड से नीचे रहने के बावजूद पानी कई ऐसे इलाकों तक क्यों पहुंचा, जिन्हें अब तक अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता रहा है। इस वर्ष गंगा का उच्चतम जलस्तर 34.60 मीटर रहा। यह 2025 के 34.65 मीटर से पांच सेंटीमीटर और 2021 के 34.86 मीटर के उच्चतम बाढ़ स्तर से 26 सेंटीमीटर नीचे है। इसके बावजूद बाढ़ का फैलाव और उससे हुई मौतों ने जलनिकासी और बदलते कैचमेंट क्षेत्र को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं।
पानी घटा, लेकिन दर्द बढ़ा गया:
बाढ़ का पानी उतरने के साथ प्रभावित इलाकों में जिंदगी सामान्य होने लगी है, लेकिन कई परिवारों में मातम है। डूबने की घटनाओं का आंकड़ा इस बार खास तौर पर चिंता बढ़ाने वाला है। बाढ़ का पानी फ़िलहाल गांव के जिस सूखे पडे पोखर, तालाब, नदियों या गड्ढे में अब भी मौजूद है वह आज खतरे की घंटी बजाने से नहीं चूक रही है। अत्यधिक मौत इन खतरनाक हो चुके इलाकों में हुई है।
डूबने की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता:
इस बार बाढ़ के साथ डूबने की घटनाएं भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आईं। जानकारों के अनुसार, कुछ पीड़ित ऐसे थे जो जलभराव वाले इलाकों की वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञ थे। पानी की गहराई का अंदाजा नहीं होने के बावजूद स्थानीय लोगों के साथ स्नान करने या पानी में जाने से हादसे हुए।
कर्मा पर्व पर सोमवार को हुई आठ मौतों ने यह सवाल और गंभीर कर दिया है कि बाढ़ के दौरान जलाशयों, नदियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर पर्याप्त सतर्कता बरती गई या नहीं।

















