
@ पत्रकार मृत्युंजय मानी ने कहा – पटना में बना राष्ट्रीय डॉल्फिन रिसर्च सेंटर शुरू हो तो गंगा और सहायक नदियों के जलीय जीवों के संरक्षण को मिलेगी मजबूती।
प्रदीप विद्रोही
पटना। राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस के अवसर पर पत्रकार एवं पर्यावरण कार्यकर्ता मृत्युंजय मानी ने देशवासियों से गांगेय डॉल्फिन के संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गंगा की पहचान और पारिस्थितिकी से जुड़ी गांगेय डॉल्फिन आज संरक्षण की गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। डॉल्फिन के संरक्षण के साथ गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने की दिशा में भी गंभीर प्रयास की आवश्यकता है।

मानी ने पटना में स्थापित राष्ट्रीय डॉल्फिन रिसर्च सेंटर के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सेंटर का भवन तैयार होने के बावजूद वहां अपेक्षित स्तर पर शोध एवं संरक्षण संबंधी गतिविधियां शुरू नहीं हो सकी हैं। उन्होंने कहा कि जिस उद्देश्य से इस संस्थान की स्थापना की गई है, उसकी पूर्ति के लिए इसे जल्द से जल्द सक्रिय किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डॉल्फिन रिसर्च सेंटर के प्रभावी ढंग से कार्यरत होने पर गांगेय डॉल्फिन के साथ-साथ गंगा और उसकी सहायक नदियों में पाए जाने वाले विभिन्न जलीय जीव-जंतुओं के संरक्षण को भी वैज्ञानिक आधार मिल सकता है। उनके अनुसार, इसके माध्यम से डॉल्फिन के व्यवहार, आवास, भोजन, प्रजनन, नदी के पर्यावरणीय बदलाव तथा जलीय जैव विविधता से जुड़े विषयों पर व्यवस्थित शोध को बढ़ावा दिया जा सकता है।
केंद्र और राज्य सरकार से पहल की मांग:

मृत्युंजय मानी ने कहा कि रिसर्च सेंटर के संचालन के लिए राज्य सरकार को केंद्र सरकार से आवश्यक सहयोग लेना चाहिए और यदि जरूरी हो तो राज्य स्तर पर भी इसके संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण संस्थान का प्रभावी उपयोग नहीं होना चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि डॉल्फिन संरक्षण केवल एक जलीय जीव को बचाने का अभियान नहीं है, बल्कि यह गंगा की सेहत और उसकी जैव विविधता से भी जुड़ा विषय है। गंगा में डॉल्फिन सहित विभिन्न जलीय जीवों की मौजूदगी नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। इसलिए नदी को स्वच्छ और जलीय जीवों के लिए सुरक्षित बनाए रखने के लिए शोध एवं संरक्षण के वैज्ञानिक प्रयासों को गति देना जरूरी है।
डॉल्फिन संरक्षण के इतिहास में बिहार की महत्वपूर्ण भूमिका:
मानी ने कहा कि गांगेय डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया में बिहार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके अनुसार, वर्ष 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल से डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था।
उन्होंने डॉल्फिन संरक्षण के क्षेत्र में प्रो. आरके सिन्हा के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें ‘डॉल्फिन मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि बिहार में डॉल्फिन के अध्ययन और संरक्षण को वैज्ञानिक आधार देने में प्रो. आरके सिन्हा की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
मानी ने डॉल्फिन संरक्षण के क्षेत्र में गोपाल शर्मा के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गोपाल शर्मा को ‘डॉल्फिन बॉय’ के नाम से जाना जाता है और उन्होंने भी डॉल्फिन के संरक्षण एवं अध्ययन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है।
रिसर्च सेंटर के संचालन को लेकर चिंता:
मानी ने कहा कि गोपाल शर्मा को राष्ट्रीय डॉल्फिन रिसर्च सेंटर का मानद अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन बाद में उन्हें इस जिम्मेदारी से हटा दिया गया और सेंटर को विभागीय नियंत्रण में रखा गया। उन्होंने कहा कि डॉल्फिन संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय से काम करने वाले विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की विशेषज्ञता का संस्थागत स्तर पर अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डॉल्फिन रिसर्च सेंटर केवल एक भवन तक सीमित न रहे, बल्कि इसे शोध, प्रशिक्षण, संरक्षण और जनजागरूकता का प्रमुख केंद्र बनाया जाए। इसके लिए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, पर्यावरणविदों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है।
गंगा की जैव विविधता बचाने की जरूरत:
मृत्युंजय मानी ने कहा कि गांगेय डॉल्फिन का संरक्षण गंगा की जैव विविधता बचाने की व्यापक मुहिम का हिस्सा होना चाहिए। नदी में प्रदूषण, जल प्रवाह में बदलाव, अवैध शिकार, मछली पकड़ने के कुछ तरीकों और मानवीय गतिविधियों से जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास पर पड़ने वाले प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।
उन्होंने राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस पर केंद्र और राज्य सरकार से पटना स्थित राष्ट्रीय डॉल्फिन रिसर्च सेंटर को प्रभावी रूप से संचालित करने, विशेषज्ञों की सेवाएं लेने और गंगा की जलीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने की मांग की।
मानी ने कहा कि डॉल्फिन संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। आम लोगों, मछुआरा समुदाय, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और पर्यावरण प्रेमियों को भी इसके संरक्षण के प्रति जागरूक होना होगा। उन्होंने देशवासियों से गंगा और उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ रखने तथा जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास की रक्षा में सहयोग करने की अपील की। मृत्युंजय मानी पत्रकार, बिहार राज्य वन्य प्राणी पर्षद के पूर्व सदस्य, पटना नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर और रोहतास के मानी जैव विविधता प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं।















