
@ यात्रियों के चढ़ने-उतरने के समय संपर्क पथ का जुड़ाव नहीं हो पा रहा सुरक्षित, किनारे लगाने में जेसीबी का लेना पड़ रहा सहारा।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा के जलस्तर में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव का असर अब बड़े जहाजों के परिचालन और यात्रियों की आवाजाही पर साफ दिखाई देने लगा है। सबसे ज्यादा परेशानी बड़े जहाजों को घाट किनारे लगाने के समय हो रही है। जलस्तर में बदलाव के कारण जहाज और घाट के बीच बनाया गया संपर्क पथ कई बार सुरक्षित तरीके से जुड़ नहीं पा रहा है। ऐसे में यात्रियों के चढ़ने और उतरने के दौरान परेशानी और जोखिम दोनों बढ़ जा रहे हैं।

स्थिति यह है कि बड़े जहाजों को घाट पर निर्धारित स्थान पर लगाने के लिए अब जेसीबी मशीन का सहारा लेना पड़ रहा है। घाट किनारे हर समय जेसीबी को तैयार रखा जा रहा है, ताकि जहाज के पहुंचने पर जरूरत के अनुसार उसे खींचकर या धकेलकर सुरक्षित तरीके से किनारे लगाया जा सके। जलस्तर अनुकूल नहीं रहने पर जहाज को घाट से सटाने में मशीन की मदद लेनी पड़ रही है।
जलस्तर घटते ही बिगड़ जाता है संपर्क:
गंगा के जलस्तर में कुछ सेंटीमीटर का बदलाव भी फ्लोटिंग जेटी और संपर्क पथ की स्थिति को प्रभावित कर रहा है। जलस्तर बढ़ने पर संपर्क पथ का ढलान और ऊंचाई बदल जाती है, जबकि पानी घटने पर जहाज और घाट के बीच दूरी तथा पथ का जुड़ाव अलग स्थिति में पहुंच जाता है। इसका सीधा असर यात्रियों के चढ़ने-उतरने की सुविधा पर पड़ता है।
बड़े जहाजों के घाट पर पहुंचने के बाद सबसे महत्वपूर्ण काम उन्हें ऐसी स्थिति में स्थिर करना होता है, जिससे यात्री आसानी से और सुरक्षित तरीके से उतर-चढ़ सकें। लेकिन जलस्तर में अचानक बदलाव होने पर संपर्क पथ पूरी तरह अनुकूल नहीं रह पाता। ऐसे में जहाज को सही स्थिति में लाने के लिए जेसीबी की मदद लेनी पड़ती है।
प्रशासन ने संपर्क पथ दुरुस्त रखने का दिया है निर्देश:
इस समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से पिछले दिनों संबंधित एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों को संपर्क पथ को दुरुस्त और यात्रियों के लिए सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था। निर्देश के बाद रोजाना संपर्क पथ की स्थिति की निगरानी और उसे व्यवस्थित रखने का प्रयास किया जा रहा है।इसके बावजूद गंगा के जलस्तर में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण प्रशासनिक तैयारी कई बार प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है। संपर्क पथ को दुरुस्त रखने के बाद भी जलस्तर बदलते ही उसकी स्थिति फिर से बदल जाती है। नतीजतन जहाजों को किनारे लगाने के दौरान तत्काल व्यवस्था करनी पड़ती है।
हर वक्त तैयार रहती है जेसीबी:
घाट पर बड़े जहाजों के परिचालन के दौरान जेसीबी की मौजूदगी अब जरूरी होती जा रही है। जहाज के पहुंचने के बाद यदि वह निर्धारित स्थान पर ठीक से नहीं लग पाता है तो जेसीबी की मदद से उसे खींचकर सही जगह पर लाया जाता है। इसके बाद संपर्क पथ को जहाज से जोड़कर यात्रियों की आवाजाही शुरू कराई जाती है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में अतिरिक्त समय भी लग रहा है। यात्रियों को जहाज से उतरने या चढ़ने के लिए कई बार इंतजार करना पड़ता है। खासकर एक साथ बड़ी संख्या में यात्री होने की स्थिति में यह परेशानी और बढ़ जाती है।

यात्रियों की सुरक्षा सबसे अहम:
घाट पर यात्रियों की आवाजाही के दौरान जहाज, संपर्क पथ और घाट के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। जलस्तर में बदलाव के कारण यदि संपर्क पथ का जुड़ाव ठीक नहीं रहता है तो यात्रियों के लिए असुविधा के साथ सुरक्षा का सवाल भी खड़ा हो सकता है। बुजुर्ग, बच्चे और सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को ऐसी स्थिति में विशेष परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।स्थानीय स्तर पर जुड़े लोगों का कहना है कि जब तक गंगा का जलस्तर स्थिर नहीं होता, तब तक संपर्क पथ को बार-बार समायोजित करने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में जेसीबी की व्यवस्था फिलहाल बड़े जहाजों को घाट पर सुरक्षित तरीके से लगाने में सहायक साबित हो रही है।
जलस्तर स्थिर होने तक चुनौती बरकरार:
प्रशासन की ओर से संपर्क पथ को दुरुस्त रखने के निर्देश पर हर दिन काम किया जा रहा है, लेकिन गंगा के जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव ने इस व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। एक दिन दुरुस्त किया गया संपर्क पथ अगले ही दिन जलस्तर में बदलाव के कारण फिर से समायोजन मांगने लगता है।ऐसे में आने वाले दिनों में भी बड़े जहाजों को घाट पर लगाने के दौरान जेसीबी की मदद लेना जारी रहने की संभावना है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए जलस्तर के अनुरूप संपर्क पथ को तत्काल समायोजित करने की व्यवस्था को लगातार बनाए रखना प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए अहम चुनौती बनी हुई है।















