
नवगछिया थाना क्षेत्र के वार्ड 24 दुर्गा मंदिर रोड निवासी संजय प्रसाद भगत के साथ मारपीट, गाली-गलौज, छिनतई, शौचालय तोड़ने और जान का भय दिखाकर रंगदारी मांगने के मामले में पुलिस ने घाट ठाकुरबाड़ी रोड निवासी राजेश भगत उर्फ जुगनू, कंचन देवी और अन्य 4-5 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, घटना 5 सितंबर की है, जिस मामले में थाने में घटना के बाद आवेदन देने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई थी। नवगछिया पुलिस की ओर से मामले में समझाने-बुझाने का भी प्रयास किया गया था, लेकिन इसके बावजूद आरोपियों ने मारपीट, गाली-गलौज, तोड़फोड़ जारी रखी। जांच के नाम पर मामले को खींचे जाने के बाद पीड़ित पक्ष ने वरीय पुलिस पदाधिकारियों से गुहार लगाई थी।

पीडित संजय भगत, भागलपुर में 6 साल पत्रकार रहे और फिर दिल्ली में नेशनल मीडिया में 6 साल से कार्यरत निलेश कुमार के पिता हैं. इस मामले में निलेश ने भागलपुर आईजी और नवगछिया एसपी वैभव शर्मा से कार्रवाई का आग्रह किया था, जिसके बाद नवगछिया एसपी के हस्तक्षेप से आखिरकार डेढ़ महीने से ज्यादा समय बाद 29 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज हो पाई। इस मामले में नवगछिया थाना ने तत्परता दिखाते हुए मारपीट, तोड़फोड़ और एक्सटॉर्सन जैसे क्राइम के लिए सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। केस के अनुसंधान पदाधिकारी ने अपने स्तर से घटनास्थल की जांच की और पीड़ित पक्ष और गवाहों का बयान दर्ज किया है। वहीं मामले में सुपरविजन भी जारी है और वरीय पुलिस पदाधिकारी ने घटनास्थल का दौरा कर मामले की जानकारी ली है।
क्या है पूरा मामला?
मामला जमीन विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। नवगछिया नगर परिषद के मौजा- मनोहरपुर कालीदास, खाता- 564, खेसरा- 123, जो कि निजी जमीन थी और सर्वे में कच्ची गली हो गई है, पुराने नक्शे में इस गली या रास्ते का नामोनिशान नहीं है। इस मामले में नवगछिया कोर्ट में टाइटल सूट लंबित है। इसी से सटे शौचालय, जो कि संजय भगत का पुश्तैनी इस्तेमाल में रहा है, उसे आरोपी पक्ष ने दबंगों के साथ मिल कर मशीन से तोड़ कर नेस्तनाबूत कर दिया।
नगर परिषद के RTI में दी गई सूचना में भी ये पुष्टि होती है कि शौचालय, संजय भगत के दखल में रहा है और आरोपी पक्ष उसे तोड़कर गली में निकलने की मंशा रखते हैं। इस मामले में सहयोग पोर्टल से मिले आदेश पर पुनर्विचार के लिए एक याचिका दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि तथ्यों को छिपाकर न्याय व्यवस्था का दुरुपयोग करने की कोशिश की गई। ये मामला अभी विचाराधीन है। जबकि राज्य सरकार के निर्देश पर DCLR नवगछिया के स्तर से अलग से एक और जांच चल रही है।

सिविल जांच प्रक्रिया से इतर पीड़ित पक्ष ने उनके साथ हुए आपराधिक घटना के लिए पुलिस में आवेदन दिया था, जिसमें शौचालय तोड़ने के साथ-साथ उनके साथ मारपीट करने, पैसे छीन लेने और रंगदारी मांगने के आरोप भी लगाए गए हैं. पुलिस 444/2026 प्राथमिकी दर्ज कर जांच कर रही है।
बिहार DGP को आवेदन- निष्पक्ष जांच प्रभावित न हो
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस मामले में विरोधी उनके खिलाफ झूठा केस दर्ज करा सकते हैं और उन्हें किसी अप्रिय घटना होने का भी संदेह है। इस मामले में पीड़ित पक्ष ने पटना में बिहार पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी आवेदन दिया है। इसमें उन्होंने कहा है कि आरोपी पक्ष का पहले से ही आपराधिक इतिहास रहा है और नवगछिया थाना में ही 315/18 और 342/19 केस दर्ज है।
DGP को दिए गए आवेदन में निलेश कुमार ने आशंका जताई है कि कहीं स्थानीय नेताओं के दबाव में जांच प्रभावित न किया जाए और द्वेष में या फिर किसी के प्रभाव में आकर उनके 72 वर्षीय पिताजी संजय भगत पर ही झूठे केस में कोई कार्रवाई न हो जाए। आवेदन में उन्होंने लिखा है कि उन्हें FIR PS- 444/2026 केस को कमजोर करने की कोशिश की भी आशंका है। इसलिए इस मामले की जांच कर PS- 444/2026 केस में निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और उनके बुजुर्ग माता-पिता की सुरक्षा सुनिश्चित कराई जाए।















