
श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन स्वामी नारायण दास जी महाराज ने कराया भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का श्रवण, धार्मिक झांकियों में शिव-पार्वती, गणेश, मां कालिका और मां सरस्वती के दिव्य स्वरूपों का हुआ भव्य प्रदर्शन
नवगछिया। गोपालपुर प्रखंड क्षेत्र के गोसाई गांव स्थित गंगा तट पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन भक्ति, श्रद्धा और धार्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा के दौरान स्वामी नारायण दास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह का अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के पावन विवाह की कथा का श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। वहीं, आयोजन के दौरान प्रस्तुत की गई विभिन्न धार्मिक झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। शिव परिवार, मां कालिका और मां सरस्वती की भव्य झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। आकर्षक वेशभूषा, मनमोहक सजावट और सजीव प्रस्तुतियों से पूरा कथा स्थल भक्तिमय हो उठा।

छठे दिन कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। गंगा तट पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष एवं ग्रामीण श्रद्धालु शामिल हुए। एक ओर स्वामी नारायण दास जी महाराज श्रीमद्भागवत के माध्यम से भगवान की दिव्य लीलाओं और विवाह प्रसंग का वर्णन कर रहे थे, तो दूसरी ओर धार्मिक झांकियों की प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद प्रदान कर रही थीं।
महाराज जी ने सुनाया भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग
श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन स्वामी नारायण दास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। कथा के माध्यम से महाराज जी ने बताया कि माता रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य और पति मानती थीं। उनका मन पूरी तरह भगवान श्रीकृष्ण के प्रति समर्पित था। जब उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से कराने का निर्णय लिया, तब माता रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर उनसे रक्षा की प्रार्थना की।
महाराज जी ने भगवान श्रीकृष्ण के रुक्मिणी हरण और उनके साथ विवाह के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने माता रुक्मिणी की पुकार सुनकर उन्हें स्वीकार किया और उनका हरण कर विधि-विधान से विवाह किया।

कथा के माध्यम से महाराज जी ने प्रेम, विश्वास, समर्पण और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति में दिखावा नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता और पूर्ण समर्पण महत्वपूर्ण होता है। भगवान अपने सच्चे भक्तों की पुकार अवश्य सुनते हैं। विवाह प्रसंग के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे रहे और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से कथा स्थल गूंजता रहा।
शिव परिवार की भव्य झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
छठे दिन के आयोजन में धार्मिक झांकियों की प्रस्तुति ने विशेष आकर्षण पैदा किया। इसमें भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश के दिव्य स्वरूपों को एक साथ शिव परिवार के रूप में प्रस्तुत किया गया। भव्य सजावट और आकर्षक वेशभूषा के साथ तैयार की गई इस झांकी को देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
शिव परिवार की झांकी में भगवान महादेव, माता पार्वती और भगवान गणेश के स्वरूपों का सुंदर चित्रण किया गया। कलाकारों की प्रस्तुति और झांकी की सजावट ने धार्मिक वातावरण को और भी आकर्षक बना दिया। श्रद्धालु काफी देर तक इस मनमोहक प्रस्तुति को निहारते रहे।
मां कालिका और मां सरस्वती की भव्य झांकियों ने मोहा मन
धार्मिक प्रस्तुतियों के क्रम में मां कालिका की भव्य झांकी का प्रदर्शन भी किया गया। मां के दिव्य स्वरूप, आकर्षक श्रृंगार और पारंपरिक वेशभूषा ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। वहीं, ज्ञान और विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की भव्य झांकी भी प्रस्तुत की गई। मां सरस्वती के शांत, सुंदर और दिव्य स्वरूप ने उपस्थित लोगों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
तीनों धार्मिक झांकियों में कलाकारों की तैयारी, साज-सज्जा और प्रस्तुति की विशेष झलक देखने को मिली। शिव परिवार, मां कालिका और मां सरस्वती के स्वरूपों के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। झांकियों के दौरान कथा स्थल तालियों और जयकारों से गूंजता रहा।
गोसाई गांव के जगत लाल यादव ने तैयार की तीनों भव्य झांकियां
छठे दिन प्रस्तुत की गई तीनों भव्य धार्मिक झांकियों की तैयारी गोसाई गांव के जगत लाल यादव द्वारा की गई थी। उन्होंने भगवान शिव परिवार, मां कालिका और मां सरस्वती की झांकियों को आकर्षक एवं मनमोहक स्वरूप प्रदान किया। झांकियों की सजावट, पात्रों की वेशभूषा और धार्मिक स्वरूपों की प्रस्तुति में विशेष मेहनत देखने को मिली।
स्थानीय स्तर पर तैयार की गई इन झांकियों ने आयोजन में ग्रामीण सहभागिता और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा की सुंदर झलक प्रस्तुत की। श्रद्धालुओं ने तीनों झांकियों की सराहना की। धार्मिक प्रसंगों को सजीव रूप में प्रस्तुत करने के प्रयास ने छठे दिन के कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया।
गंगा तट पर भक्ति और धार्मिक उल्लास का रहा माहौल
गोसाई गांव के गंगा तट पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन कथा श्रवण और धार्मिक झांकियों का सुंदर संगम देखने को मिला। स्वामी नारायण दास जी महाराज के मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का श्रवण करने के साथ श्रद्धालुओं ने शिव परिवार, मां कालिका और मां सरस्वती की भव्य झांकियों का आनंद लिया।
संध्या बेला में पूरा कथा स्थल भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। भगवान श्रीकृष्ण, राधे-राधे और हर-हर महादेव के जयकारों से गंगा तट गुंजायमान होता रहा। छठे दिन का आयोजन कथा के आध्यात्मिक संदेश और स्थानीय स्तर पर तैयार की गई आकर्षक धार्मिक झांकियों के कारण विशेष रूप से यादगार रहा।














