


नवगछिया। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर गुरुवार को अनुमंडल विधिक सेवा समिति, व्यवहार न्यायालय, नवगछिया की ओर से बार एसोसिएशन परिसर में विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश तथा वरिष्ठ नागरिकों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने से संबंधित योजना के तहत आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, पारा विधिक स्वयंसेवक और वरिष्ठ नागरिक शामिल हुए।

शिविर का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों और सरकार की ओर से उपलब्ध विधिक सहायता के बारे में जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नागरिकों को बताया गया कि उम्र बढ़ने के साथ उन्हें अपने अधिकारों और कानूनी संरक्षण की जानकारी होना बेहद आवश्यक है। यदि परिवार या समाज में उनके साथ किसी प्रकार का अन्याय होता है अथवा उनके भरण-पोषण और संपत्ति से जुड़ी समस्या उत्पन्न होती है, तो वे कानून के माध्यम से अपनी समस्या का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं संसाधन व्यक्ति के रूप में कृष्ण कुमार आजाद, पैनल अधिवक्ता सह वरिष्ठ नागरिक अधिकरण स्थित विधिक सहायता क्लिनिक, नवगछिया के प्रभारी मौजूद रहे। उन्होंने उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों को सरल भाषा में विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी और बताया कि किसी भी कानूनी समस्या की स्थिति में वरिष्ठ नागरिकों को अकेले परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। विधिक सेवा संस्थाओं के माध्यम से उन्हें आवश्यक कानूनी सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सकता है।
भरण-पोषण से संबंधित अधिकारों की दी जानकारी
पैनल अधिवक्ता कृष्ण कुमार आजाद ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को भरण-पोषण का अधिकार प्राप्त है। यदि संतान अपने माता-पिता या वरिष्ठ नागरिकों की उचित देखभाल और भरण-पोषण नहीं करती है, तो संबंधित अधिकरण में आवेदन किया जा सकता है।
उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से अपील की कि वे अपने अधिकारों को समझें और किसी प्रकार की परेशानी होने पर उचित कानूनी मंच का सहारा लें। उन्होंने यह भी बताया कि कानून का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराने में सहायता करना है।
संपत्ति को लेकर भी वरिष्ठ नागरिकों को किया जागरूक
शिविर में वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिवक्ता ने बताया कि कई बार वरिष्ठ नागरिक अपने बच्चों को संपत्ति इस भरोसे पर दे देते हैं कि बच्चे भविष्य में उनकी देखभाल करेंगे। यदि संपत्ति हस्तांतरित करने के बाद उनकी उचित देखभाल नहीं की जाती है, तो ऐसी परिस्थितियों में कानून के तहत उपलब्ध उपायों का सहारा लिया जा सकता है।
उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को सलाह दी कि संपत्ति से जुड़े किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसके कानूनी प्रभाव को अच्छी तरह समझें और आवश्यकता पड़ने पर विधिक विशेषज्ञ से सलाह लें।
जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगी निःशुल्क कानूनी सहायता
शिविर में आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि पात्र वरिष्ठ नागरिकों को व्यवहार न्यायालय के माध्यम से निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने सहित आवश्यक कानूनी सहायता प्रदान की जा सकती है। पारा विधिक स्वयंसेवकों के माध्यम से भी लोगों को संबंधित विधिक सेवा संस्थान तक पहुंचने और आवश्यक प्रक्रिया समझने में सहायता दी जाती है।
अधिवक्ता ने कहा कि आर्थिक परेशानी के कारण किसी वरिष्ठ नागरिक को अपने कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं होना चाहिए। जरूरतमंद लोग विधिक सेवा समिति से संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
वरिष्ठ नागरिकों ने रखीं अपनी जिज्ञासाएं
कार्यक्रम के दौरान मौजूद वरिष्ठ नागरिकों ने अपने अधिकारों और कानूनी प्रावधानों से संबंधित विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की। अधिवक्ता ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। पारा विधिक स्वयंसेवकों ने भी वरिष्ठ नागरिकों को आवश्यक सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया।
शिविर में अधिवक्ताओं और पारा विधिक स्वयंसेवकों ने भी लिया हिस्सा
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्तागण, पारा विधिक स्वयंसेवक और वरिष्ठ नागरिक मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज और परिवार की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उनके अधिकारों की रक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना परिवार के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के अंत में अनुमंडल विधिक सेवा समिति की ओर से सभी वरिष्ठ नागरिकों के स्वस्थ, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की कामना की गई। समिति की ओर से कहा गया कि विधिक जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य कानून की जानकारी को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि कोई भी व्यक्ति जानकारी के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित न रहे।
















