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प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। भागलपुर के सांसद ने बिहार में हर वर्ष गंगा, कोसी समेत प्रमुख नदियों से उत्पन्न होने वाली बाढ़, तट कटाव और गाद की समस्या के स्थायी समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकार से वर्षभर वैज्ञानिक नदी प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने की मांग की है। सांसद ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को अलग-अलग पत्र भेजे हैं।


सांसद ने अपने पत्र में कहा है कि बिहार की बाढ़ की समस्या को केवल नेपाल से आने वाले पानी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों से पानी के साथ बड़ी मात्रा में गाद आती है। मैदानी इलाकों में नदी की गति कम होने पर यह गाद विभिन्न स्थानों पर जमा होती है। इसके अलावा कोसी, गंडक, घाघरा, सोन सहित अन्य नदियों का पानी और गाद गंगा में मिलने से नदी की धारा, नदी तल और तटों में लगातार बदलाव होता है।
हर वर्ष हो ‘River Health Check-up’:
अजय कुमार मंडल ने गंगा, कोसी और बिहार की अन्य प्रमुख नदियों का नियमित ‘River Health Check-up’ कराने का सुझाव दिया है। इसके तहत नदी की गहराई, नदी तल में जमा गाद, जल प्रवाह, तट कटाव, धारा में बदलाव और संवेदनशील क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग की गई है।
उन्होंने इसके लिए Satellite Imaging, Remote Sensing, Drone Survey, GPS Mapping तथा आधुनिक Hydrological और Flood Modeling तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया है।
विक्रमशिला सेतु क्षेत्र की विशेष निगरानी
सांसद ने भागलपुर और विक्रमशिला सेतु के आसपास गंगा की धारा, कटाव और गाद की स्थिति का विशेष एवं निरंतर अध्ययन कराने की आवश्यकता बताई है। उनका कहना है कि इससे संभावित खतरों की पहले पहचान कर समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।
गाद प्रबंधन और तटबंधों से आगे की रणनीति
पत्र में गाद प्रबंधन को बिहार की बाढ़ नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की मांग की गई है। सांसद ने कहा कि जहां वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से आवश्यक हो, वहां अध्ययन के आधार पर Dredging/Desilting और अन्य उपयुक्त River Training उपाय किए जाएं।
उन्होंने केवल तटबंधों की मरम्मत या मजबूती को बाढ़ का स्थायी समाधान मानने के बजाय नदी की प्राकृतिक गतिशीलता, जल निकासी, बाढ़ पूर्व चेतावनी, तट संरक्षण और अन्य संरचनात्मक एवं गैर-संरचनात्मक उपायों को एकीकृत रूप से लागू करने की बात कही है।
नेपाल-भारत के बीच आंकड़ों के आदान-प्रदान पर जोर:
सांसद ने नेपाल, भारत और बिहार के बीच वर्षा, जलस्तर, डिस्चार्ज, गाद और बाढ़ की पूर्व चेतावनी से संबंधित आंकड़ों के समयबद्ध आदान-प्रदान की व्यवस्था को और मजबूत करने का सुझाव दिया है, ताकि बाढ़ से पहले संवेदनशील इलाकों में प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग:
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्रों में सांसद ने केंद्रीय जल आयोग (CWC), ISRO, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NIH), CWPRS, IIT/NIT, मौसम एवं आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों तथा बिहार सरकार के संबंधित विभागों की संयुक्त विशेषज्ञ समिति गठित कर बिहार की प्रमुख नदियों का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन कराने का आग्रह किया है।
उन्होंने इस अध्ययन के आधार पर गंगा एवं बिहार समेकित नदी प्रबंधन की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने और बिहार की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र से विशेष बाढ़ एवं नदी प्रबंधन पैकेज पर विचार करने की मांग की है।
सांसद ने वर्षभर नदी की निगरानी, गाद प्रबंधन, तट संरक्षण, बाढ़ पूर्व चेतावनी और आवश्यक रखरखाव के लिए एक समर्पित नदी प्रबंधन प्राधिकरण या संस्थागत व्यवस्था बनाने का भी सुझाव दिया है।
अजय कुमार मंडल ने कहा है कि बिहार को बाढ़ से पूरी तरह मुक्त करने का दावा वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा, क्योंकि बाढ़ नदी की प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा भी है। हालांकि, वैज्ञानिक अध्ययन, साझा आंकड़ों और पूरे नदी तंत्र के वर्षभर प्रबंधन के जरिए बाढ़ से होने वाली तबाही को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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