


गंगा कटाव, आवास और पेंशन की समस्याएं लेकर पहुंचे ग्रामीण, पहले दिन उमड़ी भारी भीड़
भागलपुर : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल पर मंगलवार से जिले के 38 पंचायतों में “सहयोग शिविर” की शुरुआत हुई। पहले ही दिन विभिन्न पंचायतों में आयोजित शिविरों में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और वर्षों से लंबित समस्याओं को प्रशासन के समक्ष रखा।

सबौर प्रखंड के ममलखा हाई स्कूल परिसर में आयोजित सहयोग शिविर का उद्घाटन बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास मंत्री सह भागलपुर प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा ने किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह, नाथनगर विधायक मिथुन यादव सहित कई जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
शिविर में विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए थे, जहां ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं से संबंधित आवेदन जमा किए। जिलाधिकारी ने बताया कि केवल ममलखा पंचायत शिविर में ही लगभग 200 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें गंगा कटाव, भूमि विवाद, राशन कार्ड, पेंशन, आवास योजना और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें प्रमुख रहीं।

ग्रामीणों ने बताया कि वे महीनों से प्रखंड और जिला कार्यालयों का चक्कर लगा रहे थे, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा था। ऐसे में पंचायत स्तर पर शिविर लगने से लोगों को उम्मीद जगी है।
गंगा कटाव का मुद्दा सबसे ज्यादा गूंजा
सहयोग शिविर में सबसे अधिक चिंता गंगा कटाव को लेकर देखने को मिली। कटाव प्रभावित ग्रामीणों ने तटबंध निर्माण और कटाव-रोधी कार्य में तेजी लाने की मांग की। लोगों का कहना था कि गंगा लगातार गांवों की ओर बढ़ रही है, जिससे खेत, घर और सड़कें खतरे में हैं।

जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी और विधायक मिथुन यादव ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि कटाव प्रभावित क्षेत्रों में जल्द ही कार्य में तेजी लाई जाएगी। अधिकारियों ने आवेदन प्राप्त कर जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया।
आवेदन तो लिए गए, लेकिन मौके पर समाधान नहीं
हालांकि शिविर में किसी भी मामले का मौके पर निष्पादन नहीं हो सका। कई लोगों को आवेदन जमा करने की रसीद दी गई और बताया गया कि संबंधित विभाग आगे की कार्रवाई करेंगे।

शिविर में पहुंची जूली देवी नामक महिला ने कहा कि पहले छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन गांव में शिविर लगने से उम्मीद बढ़ी है कि अब समाधान मिलेगा।
मंत्री के जाते ही बंद होने लगे स्टॉल
सहयोग शिविर के पहले दिन प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीर भी सामने आई। स्थानीय लोगों के अनुसार प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा के कार्यक्रम स्थल से रवाना होते ही कई विभागीय स्टॉल बंद होने लगे, जबकि शिविर को कार्यालय अवधि तक संचालित करने का निर्देश था। इससे कई ग्रामीणों को बिना आवेदन दिए निराश होकर लौटना पड़ा।

स्थानीय मुखिया प्रतिनिधियों ने लोगों को आश्वासन दिया कि प्रखंड कार्यालय में भी आवेदन लिए जाएंगे और समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया जारी रहेगी।
प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि लोगों की समस्याओं का समाधान गांव स्तर पर ही हो, ताकि उन्हें बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि इस तरह के सहयोग शिविर आगे भी लगातार आयोजित किए जाएंगे।
















