


5 जून से छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू होने की उम्मीद, तकनीकी जांच जारी
भागलपुर : भागलपुर को सीमांचल से जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु पर बनाए जा रहे अस्थायी बेली ब्रिज का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। मंगलवार को जिला प्रशासन, तकनीकी विशेषज्ञों और निर्माण एजेंसियों की संयुक्त टीम ने बेली ब्रिज की लॉन्चिंग प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली। इसके बाद अब पुल की अंतिम तकनीकी जांच और डिजाइनिंग का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि यदि सभी तकनीकी परीक्षण सफल रहते हैं तो आगामी 5 जून से छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल इंजीनियरिंग टीम पुल के विभिन्न हिस्सों की मजबूती, एप्रोच रोड तथा लोड क्षमता का अंतिम मूल्यांकन करने में जुटी हुई है।
गौरतलब है कि 4 मई को विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज समेत सीमांचल के कई जिलों का सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हो गया था। पुल बंद होने के कारण हजारों यात्रियों, व्यापारियों और छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने शुरुआत में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर नाव सेवा शुरू कराई थी, लेकिन यात्रियों के बढ़ते दबाव और आवागमन की समस्या को देखते हुए अस्थायी बेली ब्रिज निर्माण का निर्णय लिया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार शुरुआती चरण में इस बेली ब्रिज पर केवल हल्के और छोटे वाहनों को ही अनुमति दी जाएगी। इसमें बाइक, ऑटो, कार और छोटे व्यावसायिक वाहन शामिल हो सकते हैं। भारी ट्रक और ओवरलोडेड वाहनों की आवाजाही फिलहाल प्रतिबंधित रहने की संभावना है।

तकनीकी विशेषज्ञ पुल की भार वहन क्षमता का आकलन कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार इस तरह के स्टील स्ट्रक्चर वाले बेली ब्रिज सामान्यतः 18 से 40 टन तक भार वहन करने में सक्षम होते हैं, हालांकि इसकी अंतिम क्षमता डिजाइन और संरचना पर निर्भर करेगी।
बेली ब्रिज को दुनिया की सबसे मजबूत अस्थायी पुल प्रणालियों में माना जाता है। उच्च गुणवत्ता वाले स्टील पैनलों से बनने वाला यह पुल कम समय में तैयार किया जा सकता है। सेना और आपदा प्रबंधन एजेंसियां अक्सर बाढ़, युद्ध या पुल क्षतिग्रस्त होने जैसी आपात परिस्थितियों में इसका उपयोग करती हैं।















