


@ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वर्चुअल माध्यम से जिले के सभी 17 मॉडल स्कूलों का एक साथ उद्घाटन किया, जिससे हजारों विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अवसर खुल गए।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। शिक्षा की गुणवत्ता अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहेगी। भागलपुर के हर प्रखंड में आधुनिक सुविधाओं से लैस एक-एक सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) शुरू हो गया है। रविवार को मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से जिले के सभी 17 मॉडल स्कूलों का एक साथ उद्घाटन किया, जिससे हजारों विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अवसर खुल गए।
इन विद्यालयों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच संसाधनों का अंतर कम करने की कोशिश की जाएगी। आधुनिक कक्षाएं, तकनीक आधारित शिक्षण, बेहतर शैक्षणिक माहौल और व्यक्तित्व विकास पर विशेष जोर इन स्कूलों की पहचान होंगे।
जिले के सभी 17 चयनित विद्यालयों में उद्घाटन समारोह आयोजित किए गए, जहां जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ इस पहल का स्वागत किया। कई विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए नए सत्र का आगाज हुआ।
मुख्य समारोह पी. झा उच्च विद्यालय परिसर स्थित सरस्वती विद्या निकेतन में आयोजित हुआ, जहां जिलाधिकारी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने विद्यालय की शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाओं का निरीक्षण करते हुए कहा कि मॉडल स्कूल केवल नई इमारतों का नाम नहीं हैं, बल्कि यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक शिक्षण व्यवस्था का नया मॉडल हैं।
जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें नियमित अध्ययन, अनुशासन और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। वहीं अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने और शिक्षकों से नैतिक मूल्यों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का आग्रह किया।
भागलपुर में जिन 17 विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया गया है, उनमें जगदीशपुर, नाथनगर, सबौर, शाहकुंड, सुलतानगंज, गोराडीह, कहलगांव, पीरपैंती, सन्हौला, खरीक, बिहपुर, गोपालपुर, इस्माइलपुर, नारायणपुर, नवगछिया, रंगरा चौक और नगर निगम क्षेत्र का जिला स्कूल शामिल है।
जिला प्रशासन का मानना है कि ये मॉडल स्कूल आने वाले वर्षों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के उत्कृष्ट केंद्र बनेंगे और नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अब देखना होगा कि आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित ये विद्यालय विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव और शैक्षणिक परिणामों में कितना बदलाव ला पाते हैं।
















