
@ छठ और दीपावली की थीम पर सजी हटिया में पारंपरिक लोककला के साथ दिखा रचनात्मकता का संगम, किलकारी के बच्चों की कलाकृतियां भी बनीं आकर्षण। महिला कलाकारों ने बताया रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। अंग प्रदेश की पारंपरिक मंजूषा चित्रकला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रविवार को भागलपुर संग्रहालय परिसर में छठी ‘मंजूषा हटिया’ का आयोजन किया गया। कला एवं संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन और भागलपुर संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 30 से अधिक युवा एवं वरिष्ठ कलाकारों ने अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई। बड़ी संख्या में पहुंचे कला प्रेमियों ने कलाकृतियों की सराहना के साथ खरीदारी भी की।
कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन, शिक्षाविद् राजीवकांत मिश्रा, जिला योजना पदाधिकारी मोनू कुमार, वरिष्ठ छायाकार रंजन जी, डॉ. उलूपी झा एवं डॉ. मंजीत सिंह किनवार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस बार हटिया की थीम छठ महापर्व एवं दीपावली रही। प्रदर्शनी में मंजूषा चित्रों से सजे दीये, वंदनवार, छठ पूजा के सूप, पूजन सामग्री, वस्त्र, सजावटी सामान और स्टेशनरी सहित दैनिक उपयोग की कई वस्तुएं प्रदर्शित की गईं। किलकारी बिहार बाल भवन के बच्चों की कलाकृतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं।
आयोजन की संयोजक प्रियंवदा प्रियदर्शी और अर्पणा किशोर ने बताया कि मंजूषा हटिया कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन और बिक्री का नियमित मंच उपलब्ध करा रही है। डॉ. उलूपी झा ने कहा कि इससे महिला कलाकारों को रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का अवसर मिल रहा है। वहीं, राजीवकांत मिश्रा ने इसे भागलपुर की लोकसंस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मंजीत सिंह किनवार, राजीवकांत मिश्रा, डॉ. उलूपी झा, रंजन जी, अंकित रंजन एवं सुरभि सुमन ने काव्य पाठ भी किया। इसके अलावा जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने कलाकारों को मंजूषा चित्रकला की मूल संरचना, रंग-विधान और चित्र संयोजन की तकनीकी जानकारी दी।

अंकित रंजन ने कहा कि मंजूषा हटिया का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को नियमित बाजार उपलब्ध कराने के साथ पारंपरिक लोककला को आम लोगों के दैनिक जीवन से जोड़ना है। उल्लेखनीय है कि इसका आयोजन प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को भागलपुर संग्रहालय परिसर में किया जाता है।















