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प्रदीप विद्रोही
भागलपुर/सुल्तानगंज। श्रावणी मेले के आठवें दिन गुरुवार को सुल्तानगंज से देवघर जाने वाला 105 किलोमीटर लंबा कांवरिया पथ पूरी तरह भगवामय नजर आया। ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोष के बीच लाखों शिवभक्त उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ते रहे। 30 जुलाई को मेले के शुभारंभ के बाद से अब तक 12 लाख से अधिक कांवरिए सुल्तानगंज से जल लेकर देवघर के लिए रवाना हो चुके हैं।


इस बार आस्था के इस महासागर में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बना 15 किलो वजनी डमरू आकार का कांवड़। झारखंड के धनबाद से पहुंचे शिवभक्त अजय विश्वकर्मा अपनी अनूठी कांवड़ के साथ जैसे ही कांवरिया पथ पर निकले, श्रद्धालुओं की भीड़ उन्हें देखने उमड़ पड़ी। लोगों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और इस विशेष कांवड़ की बनावट व उसकी खासियत के बारे में जानकारी ली।
अजय विश्वकर्मा ने बताया कि वह पिछले सात वर्षों से लगातार सुल्तानगंज से पैदल गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच रहे हैं। हर साल वे अपनी कांवड़ को नया स्वरूप देने की कोशिश करते हैं। इस बार भगवान शिव के प्रिय डमरू के आकार की कांवड़ तैयार करने में कई दिनों की मेहनत लगी, लेकिन श्रद्धालुओं का स्नेह और उत्साह देखकर उनकी सारी मेहनत सफल हो गई।
इधर, नमामि गंगे और अजगैबीनाथ घाट पर दिन-रात जल भरने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार उमड़ रही है। महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे – हर उम्र के श्रद्धालु एक ही संकल्प के साथ 105 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा पर निकल रहे हैं। कांवरिया पथ पर हर चेहरा शिवभक्ति में डूबा और हर जुबान पर सिर्फ एक ही उद्घोष सुनाई दे रहा है – ‘बोल बम’।
श्रद्धालुओं की यात्रा को सहज और सुरक्षित बनाने के लिए बिहार और झारखंड सरकार के साथ जिला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। करीब 85 किलोमीटर लंबे कच्चे मार्ग पर नंगे पांव चलने वाले कांवरियों के लिए महीन बालू बिछाई गई है, ताकि उनके पैरों में छाले न पड़ें। उमस और तेज धूप से राहत के लिए पूरे मार्ग में वाटर स्प्रिंकलर और पानी के टैंकरों से लगातार छिड़काव किया जा रहा है।
रात के समय यात्रा सुगम बनाने के लिए पूरे कांवरिया पथ पर हाई-मास्ट लाइटें और एलईडी स्ट्रिप्स लगाई गई हैं। प्रमुख पड़ावों और प्रवेश द्वारों को आकर्षक तोरणद्वारों से सजाया गया है, जबकि भक्ति संगीत की मधुर धुनें पूरे मार्ग को शिवमय बनाए हुए हैं।
श्रावणी मेले में उमड़ रही आस्था की यह विराट तस्वीर बता रही है कि सुल्तानगंज से देवघर तक का सफर केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा, विश्वास और शिवभक्ति का जीवंत उत्सव बन चुका है।

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