
विशेषज्ञ रितेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों को नवाचार, व्यावहारिक ज्ञान और भविष्य में करियर की संभावनाओं के बारे में दी जानकारी
पूर्णिया। जी. डी. गोयनका पब्लिक स्कूल, पूर्णिया में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए विशेष टेड टॉक सत्र का आयोजन किया गया। इसमें शिक्षाविद्, तकनीकी उद्यमी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सलाहकार रितेश अग्रवाल मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार और भविष्य में करियर की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी।

वास्तविक अनुभवों से सीखने पर दिया जोर
रितेश अग्रवाल आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र और आईआईएम बेंगलुरु से दोहरे स्वर्ण पदक विजेता हैं। वे नेक्सिस स्कूल ऑफ बिजनेस के सह-संस्थापक हैं। इसके माध्यम से वास्तविक व्यावसायिक परियोजनाओं, इंटर्नशिप और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को व्यावहारिक एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। वे एपीकोड्स के संस्थापक भी हैं, जो एक दशक से अधिक समय से ब्रिटेन, यूरोप और भारत की कंपनियों को तकनीकी एवं सॉफ्टवेयर समाधान उपलब्ध करा रही है।
अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक शिक्षा, व्यवसाय तथा रोजगार के क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रही हैं। इन बदलावों के साथ विद्यार्थियों के लिए नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव, रचनात्मक सोच, समस्या समाधान की क्षमता और नए कौशल विकसित करना भी जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि भविष्य में सफल होने के लिए जिज्ञासु बने रहना, लगातार सीखते रहना और बदलती तकनीक के अनुसार खुद को विकसित करना आवश्यक है।

विद्यार्थियों ने पूछे तकनीक और करियर से जुड़े सवाल
कार्यक्रम को संवादात्मक बनाने के लिए विद्यार्थियों को मुख्य वक्ता से सीधे सवाल पूछने और अपने विचार साझा करने का अवसर दिया गया। विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लेते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, तकनीकी नवाचार और भविष्य में करियर के विकल्पों से जुड़े सवाल पूछे। मुख्य वक्ता ने उनके सवालों के जवाब देकर तकनीक के बदलते स्वरूप और उससे जुड़ी संभावनाओं को समझाया।
शिक्षा के साथ व्यावहारिक समझ भी जरूरी : पुलोमा नंदी
विद्यालय की निदेशिका-प्रधानाचार्या पुलोमा नंदी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करना भी है। इसी उद्देश्य से विद्यालय में विशेषज्ञों के व्याख्यान, टेड टॉक, अनुभव आधारित शिक्षण और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक समझ, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर मिलता है। विद्यालय वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता, नवाचार और उद्यमशीलता की भावना विकसित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
कार्यक्रम में उप-प्रधानाचार्य राज कुमार दास, प्रशासक प्रीतम दास, वरिष्ठ शैक्षणिक समन्वयक त्रिबेणी प्रसाद पांडेय सहित विद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। यह सत्र विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा तथा उन्हें भविष्य की तकनीक और करियर के नए अवसरों को समझने का मौका मिला।















