
@ ‘हैं तैयार हम’ के साथ भागलपुर में छह रेस्क्यू बोट और 12 जवान तैनात।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर । गंगा का जलस्तर बढ़े या तेज धार में कोई नाव नियंत्रण खो दे, आपात स्थिति में मदद पहुंचाने के लिए राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें नदी पर मुस्तैद हैं। भागलपुर में SDRF की टीम एक अक्टूबर से गंगा में चलने वाली फेरी और मालवाहक नौकाओं की निगरानी कर रही है। टीम का अभियान ‘हैं तैयार हम’ थीम के साथ चल रहा है।
भागलपुर जिला SDRF ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए छह इन्फ्लेटेबल रबर रेस्क्यू बोट (IRRB) तैनात की हैं। ये बोट आउटबोर्ड मोटर, लाइफ जैकेट और अन्य जरूरी बचाव उपकरणों से लैस हैं। इनके साथ 12 SDRF जवान लगातार नदी क्षेत्र में निगरानी कर रहे हैं। SDRF के इंस्पेक्टर और टीम कमांडर कुमार नीलू के मुताबिक, टीम के जवान लंबे समय तक पानी के अंदर रहकर बचाव कार्य करने के लिए प्रशिक्षित हैं। भागलपुर से नौगछिया के बीच जलमार्ग पर चलने वाली फेरी और मालवाहक नौकाओं की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

घाट से नदी तक, हर सफर पर नजर:
SDRF की टीम सिर्फ नदी में गश्त तक सीमित नहीं है। यात्रियों और नौकाओं की आवाजाही वाले घाटों पर भी जवान मौजूद रहते हैं। फेरी की यात्रा शुरू होने और समाप्त होने के दौरान टीम की निगरानी रहती है, ताकि किसी भी तरह की आपात स्थिति में तत्काल सहायता दी जा सके। कुमार नीलू ने बताया कि टीम को मेडिकल इमरजेंसी समेत हर तरह की आकस्मिक स्थिति के लिए तैयार रखा गया है। रेस्क्यू बोट और जवानों को लगातार अलर्ट मोड में रखा जाता है।
तेज धार में केले और बाइक लदी नाव को बचाया:
शनिवार को SDRF टीम ने महादेवपुर घाट से माणिक सरकार घाट की ओर जा रही एक अनधिकृत नाव को कर्गिल दियारा के पास तेज धारा में फंसने के बाद रेस्क्यू किया। नाव पर केले और एक मोटरसाइकिल लदी थी। तेज बहाव के बीच नाव का नियंत्रण बिगड़ गया था। रेस्क्यू के बाद नाविक को चेतावनी दी गई कि प्रशासन ने अनधिकृत नावों के संचालन पर रोक लगा रखी है। SDRF ने लोगों से भी अपील की है कि वे प्रतिबंधित नौकाओं से यात्रा करने से बचें और अपनी जान जोखिम में न डालें। इसके पूर्व बाढ़ बचाव कार्य में लगे बड़ी नाव के गंगा के बीच धार भंवर में फंसने और पलटने के दौरान भी इस बहादुर टीम ने करीब दर्जन भर नाव पर सवार मजदूरों की जान बचाई थी। इस हादसे में दो लोग अब भी लापता है। और भी कई हादसों में SDRF की टीम संकटमोचन बनकर सामने आ चुका है। आज भी जब विक्रमशिला सेतु बंद है तो यह टीम गंगा की तेज धारा में सक्रिय है।
बीमार यात्रियों के लिए भी मददगार बनी टीम:

गंगा पर SDRF की मौजूदगी का एक अहम हिस्सा मेडिकल इमरजेंसी में सहायता पहुंचाना भी है। यात्रा के दौरान या घाटों पर अचानक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी में फंसे मरीजों को भी टीम मदद पहुंचा रही है। नदी की तेज धार के बीच SDRF की यह निगरानी न सिर्फ नावों की सुरक्षा पर नजर रख रही है, बल्कि किसी भी अनहोनी की स्थिति में ‘पहले से तैयार, तुरंत राहत’ की व्यवस्था को मजबूत कर रही है।















