
@ डैमेज हिस्सों की ग्राइंडिंग, कार्बन फाइबर व कार्बन लेमिनेशन का कार्य जारी; मुंबई से पहुंची 48 सदस्यीय टीम जुटी।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के बंद होने के बाद पुल के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत, मजबूती और स्ट्रेंथनिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। सेतु के डैमेज हिस्सों को दुरुस्त करने के लिए विशेषज्ञ तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके तहत पुल के संबंधित हिस्सों में ग्राइंडिंग के बाद कार्बन फाइबर, कार्बन लेमिनेशन और कार्बन प्लेट लगाने का कार्य किया जा रहा है। मालूम हो कि अगले साल जनवरी में सेतु को आमजनों को सौंपना है।
बताया जा रहा है कि इस तकनीक के माध्यम से पुल के संबंधित हिस्सों की लोड कैपेसिटी और स्ट्रेंथ को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए मुंबई से एक विशेषज्ञ कंपनी की 48 सदस्यीय टीम भागलपुर पहुंची है, जो मौके पर रहकर कार्बन प्लेटिंग और स्ट्रेंथनिंग के कार्य में जुटी हुई है।
चार पिलरों से जुड़े नीचे के स्लैब में होगा मुख्य कार्य:

जानकारी के अनुसार कार्बन प्लेटिंग का कार्य विक्रमशिला सेतु के चार पिलरों से जुड़े नीचे के स्लैब वाले हिस्से में किया जाना है। पहले क्षतिग्रस्त हिस्से की सतह की ग्राइंडिंग और आवश्यक तैयारी की जाएगी। इसके बाद निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के तहत कार्बन फाइबर, कार्बन लेमिनेशन तथा कार्बन प्लेट लगाए जाएंगे।इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पुल के कमजोर या क्षतिग्रस्त हिस्सों को अतिरिक्त मजबूती देना है, ताकि आगे उस पर निर्धारित भार को सुरक्षित तरीके से वहन किया जा सके।
20 दिनों तक चलेगा कार्बन प्लेटिंग का काम:
बताया गया है कि कार्बन प्लेटिंग का कार्य लगभग 20 दिनों तक चलने की संभावना है। इस दौरान विशेषज्ञ टीम पुल के चिन्हित हिस्सों पर लगातार काम करेगी। कार्य पूरा होने के बाद पुल की संरचनात्मक क्षमता को जांचने के लिए अगला महत्वपूर्ण चरण शुरू होगा। यानी कार्बन प्लेटिंग के बाद सीधे पुल को सामान्य क्षमता पर खोलने के बजाय उसकी लोड टेस्टिंग की जाएगी, ताकि तकनीकी रूप से यह पता लगाया जा सके कि स्ट्रेंथनिंग के बाद पुल कितना भार सुरक्षित रूप से सहन कर सकता है।
180 टन क्षमता के हिसाब से होगा लोड टेस्ट:
कार्बन प्लेटिंग और स्ट्रेंथनिंग का कार्य पूरा होने के बाद विक्रमशिला सेतु पर 180 टन क्षमता के हिसाब से लोड टेस्टिंग किए जाने की बात सामने आई है।इस टेस्ट के दौरान पुल के संबंधित हिस्सों और पूरे स्ट्रक्चर के व्यवहार का तकनीकी आकलन किया जाएगा। लोड टेस्ट के परिणाम के आधार पर विशेषज्ञों और संबंधित विभाग की ओर से आगे यह तय किया जाएगा कि विक्रमशिला सेतु पर कितनी भार क्षमता के साथ परिचालन की अनुमति दी जा सकती है। इसलिए फिलहाल पुल की अंतिम भार क्षमता को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय लोड टेस्ट के परिणाम का इंतजार करना होगा।
कार्बन प्लेटिंग के बाद बढ़ सकती है पुल की उम्र:
कार्बन प्लेटिंग और स्ट्रेंथनिंग के इस कार्य को विक्रमशिला सेतु के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस तकनीकी प्रक्रिया के बाद पुल की आयु आगे करीब 20 साल तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।हालांकि पुल की वास्तविक सेवा-आयु और सुरक्षित भार क्षमता का अंतिम निर्धारण तकनीकी जांच, लोड टेस्ट और संबंधित विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाएगा।
जनता की नजर अब लोड टेस्ट के परिणाम पर:
विक्रमशिला सेतु भागलपुर और नवगछिया समेत आसपास के बड़े इलाके के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। पुल के बंद रहने से रोजाना आवागमन करने वाले लोगों के साथ-साथ व्यापार, नौकरी, शिक्षा और अन्य आवश्यक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है।ऐसे में अब लोगों की नजर मरम्मत और स्ट्रेंथनिंग के कार्य के साथ-साथ लोड टेस्टिंग के परिणाम पर टिकी है। कार्बन प्लेटिंग का काम पूरा होने, 180 टन क्षमता के अनुरूप लोड टेस्ट होने और तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुल को किस भार क्षमता के साथ दोबारा परिचालन के लिए खोला जा सकता है।
फिलहाल मुंबई से पहुंची 48 सदस्यीय टीम क्षतिग्रस्त हिस्सों को मजबूत करने के काम में जुटी है और करीब 20 दिनों तक चलने वाले कार्बन प्लेटिंग कार्य के बाद विक्रमशिला सेतु की क्षमता को परखने की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा।
अब उम्मीद यही है कि तकनीकी मजबूती के साथ विक्रमशिला सेतु जल्द सुरक्षित रूप से जनता के आवागमन के लिए उपलब्ध हो और लंबे समय तक भागलपुर-नवगछिया के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बना रहे।
















