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@ पेंशनर संघर्ष मंच ने कहा- पिछले तीन वित्तीय वर्षों में चौथी बार रोका गया अनुदान, कुलपति से राज्य सरकार से गतिरोध समाप्त करने की मांग।

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के पेंशनरों के अनुदान को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। पेंशनर संघर्ष मंच ने आरोप लगाया है कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में चौथी बार राज्य सरकार की ओर से विश्वविद्यालय के पेंशनरों का अनुदान रोका गया है। मंच के अनुसार, पिछले आवंटन में भी TMBU को अगस्त 2026 का अनुदान नहीं मिला था।

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पेंशनर संघर्ष मंच के संयोजक प्रो. पवन कुमार सिंह ने कहा कि बार-बार अनुदान रोके जाने से विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पेंशनरों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर 19 सितंबर को कुलपति के साथ पेंशनर संघर्ष मंच के प्रतिनिधिमंडल की वार्ता हुई थी। उस दौरान कुलपति ने पेंशनरों को आश्वस्त किया था कि मामला सुलझ गया है और आगे ऐसी स्थिति नहीं आएगी। मंच के अनुसार, कुलपति ने यह भी कहा था कि उपयोगिता प्रमाणपत्र को लेकर कोई गड़बड़ी नहीं है।

हालांकि, मंच के मुताबिक 1 अक्टूबर को जारी ताजा आवंटन पत्र में बिहार के अन्य विश्वविद्यालयों को नवंबर 2026 तक का अनुदान दिया गया है, जबकि TMBU को अगस्त और सितंबर तक के लिए ही स्वीकृति मिली है। मंच का आरोप है कि इसके परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय के पेंशनरों को अक्टूबर और नवंबर के अनुदान से फिर वंचित कर दिया गया है।

कुलपति से हस्तक्षेप की मांग:

पेंशनर संघर्ष मंच ने कुलपति से मांग की है कि राज्य सरकार के साथ चल रहे गतिरोध को समाप्त करने के लिए प्रभावी पहल की जाए, ताकि विश्वविद्यालय के पेंशनरों को बार-बार उत्पन्न हो रही आर्थिक असुरक्षा और परेशानी से राहत मिल सके।मंच के संयोजक प्रो. पवन कुमार सिंह ने कहा कि पेंशनरों को समय पर अनुदान उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय और सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कुलपति इस मामले में राज्य सरकार के स्तर पर आवश्यक पहल कर पेंशनरों की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करेंगे।

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