


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कहलगांव शहर और आसपास के गांवों में नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ब्राउन शुगर/बीएस/पुट जैसे नशीले पदार्थों का सेवन युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह नशा युवाओं तक पहुंच कौन और कैसे रहा है?
नए फोरलेन हाईवे पर टोल प्लाजा के पश्चिम दिशा में धर्मकांटा के बगल स्थित एक अर्धनिर्मित भवन को लेकर भी स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। इसके अलावा शहर से गांवों तक पुराने खाली पड़े घरों में बड़ी मात्रा में जली हुई बीड़ी-सिगरेट, लाइटर और माचिस आदि दिखाई देने की बात सामने आई है।

सुबह मछली खरीदने के दौरान युवाओं के एक समूह को देखकर स्थानीय नागरिक ने बातचीत की और मामले की गंभीरता सामने लाने के उद्देश्य से कुछ तस्वीरें भी लीं। अब सवाल प्रशासन से है – क्या इस पूरे इलाके की जांच होगी? यदि यहां नशीले पदार्थों की बिक्री अथवा सेवन हो रहा है, तो पुलिस प्रशासन को मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
युवाओं की उक्त टोली ने सोशल मीडिया एक्स पर आह्वान करते हुए लिखा है कि क्योंकि हर जगह पुलिस मौजूद नहीं रह सकती। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि आम नागरिक कानून अपने हाथ में लें। संदिग्ध गतिविधि दिखे तो उसकी सूचना पुलिस और प्रशासन को देना ही सही रास्ता है।
प्रशासन से अपील है कि इस मामले को सिर्फ एक शिकायत के रूप में नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दे के रूप में देखा जाए।नशा बेचने वालों पर कानून का शिकंजा कसना जरूरी है। नशे के शिकार युवाओं को अपराधी मानने के बजाय उन्हें इलाज, परामर्श और पुनर्वास की जरूरत है।
कहलगांव के लोगों का सवाल सीधा है – क्या हमारे शहर और आसपास के गांवों में नशे के इस कथित नेटवर्क की निष्पक्ष जांच होगी? अब जरूरत है चुप्पी तोड़ने की, कानून का साथ देने की और युवाओं को नशे से बचाने की।

















