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पूर्णिया। कलाभवन साहित्य विभाग के तत्वावधान में मासिक संगोष्ठी के अंतर्गत गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की स्मृति में व्याख्यान एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय के प्रथम लोकपाल डॉ. शिवमुनि यादव ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में साहित्य अकादमी, दिल्ली से पधारे डॉ. देवेंद्र कुमार देवेश उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. कामेश्वर पंकज, शिक्षाविद् डॉ. प्रभात नारायण झा, प्राचार्य डॉ. शंभू लाल वर्मा कुशाग्र तथा अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. उषा शरण शामिल हुईं।


कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। कलाभवन साहित्य विभाग की संयोजिका डॉ. निरुपमा राय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए गीतांजलि की प्रथम कविता का पाठ किया और कहा कि मातृ दिवस एवं गुरुदेव की जयंती का एक साथ होना इस आयोजन को विशेष बनाता है।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. शिवमुनि यादव ने गुरुदेव को महामानव बताते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में मानवता, प्रकृति और स्त्री विमर्श का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने ‘गीतांजलि’ और ‘गोरा’ जैसी कृतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरुदेव का साहित्य आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहा है।


मुख्य अतिथि डॉ. देवेंद्र कुमार देवेश ने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर केवल साहित्यकार ही नहीं, बल्कि संगीत, चित्रकला, नृत्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में भी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कहा कि ‘गीतांजलि’ का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद होना उनकी रचनाओं की वैश्विक लोकप्रियता को दर्शाता है। उन्होंने शांतिनिकेतन और श्रीनिकेतन की स्थापना को भारतीय शिक्षा जगत की बड़ी उपलब्धि बताया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. कामेश्वर पंकज ने गुरुदेव की कहानियों और उपन्यासों पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके साहित्य ने समाज में नवजागरण और नई चेतना का संचार किया। उन्होंने ‘अपरिचित’, ‘स्त्री पत्र’ और ‘गोरा’ जैसी कृतियों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।


इस अवसर पर डॉ. शंभू लाल वर्मा कुशाग्र, डॉ. उषा शरण, डॉ. प्रभात नारायण झा, डॉ. के.के. चौधरी एवं प्रो. विजयारानी ने भी गुरुदेव के साहित्य और व्यक्तित्व पर अपने विचार व्यक्त किए। मातृ दिवस के उपलक्ष्य में कवियों द्वारा मां पर आधारित कविताओं का पाठ किया गया, जिससे कार्यक्रम का वातावरण भावपूर्ण एवं संगीतमय हो उठा।

कार्यक्रम में रीता सिन्हा, डॉ. सरिता झा, रानी सिंह, वंदना कुमारी, नीतू कुमारी, रजनी कुमारी, भारत भूषण, मनोज कुमार राय, यमुना प्रसाद बसाक, बबीता चौधरी, सुनील समदर्शी, महेश विद्रोही, पंकज कुमार सिंह, मंजुला उपाध्याय, रणजीत तिवारी, गिरीश कुमार सिंह, विमल कुमार सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं कवि उपस्थित रहे। अंत में संयोजिका डॉ. निरुपमा राय ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए जून माह के प्रथम रविवार को अगली मासिक गोष्ठी आयोजित किए जाने की घोषणा की।

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