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भागलपुर।सबौर प्रखंड के फरका पंचायत में बाढ़ से पहले शुरू किए गए कटावरोधी कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने कार्य में अनियमितता और सुस्ती का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस गति से काम चल रहा है, उससे बाढ़ आने से पहले कार्य पूरा होना मुश्किल है।


ग्रामीणों के अनुसार, हर वर्ष गंगा नदी में कटाव के कारण कई मकान नदी में समा जाते हैं। अब तक 15 से 20 पक्के मकान कटाव की भेंट चढ़ चुके हैं, जिससे कई परिवार बेघर हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि मेहनत की कमाई से बनाए गए घर हर साल बाढ़ में ध्वस्त हो जाते हैं और प्रशासन केवल आश्वासन देकर रह जाता है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कटाव रोकने के नाम पर विभाग द्वारा जेसीबी मशीन से घाट की मिट्टी काटकर गंगा किनारे डाली जा रही है, जिससे कटाव रुकने के बजाय और बढ़ने की आशंका है। साथ ही, गंगा किनारे डाले जा रहे जिओ बैग की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी के ऊपर जिओ बैग डालने से कटाव नहीं रुकेगा, बल्कि इन्हें पानी के अंदर मजबूती से लगाया जाना चाहिए।


स्थानीय लोगों ने बताया कि विभागीय कार्य की गति बेहद धीमी है और अभी तक 10 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। बुधवार को कार्य स्थल पर काम बंद मिला और कोई अधिकारी भी मौजूद नहीं थे, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया।

ग्रामीणों ने कहा कि वे इस समस्या को लेकर आंदोलन भी कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी हर बार केवल आश्वासन देकर चले जाते हैं, जबकि कटाव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।

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