
@ चीफ इंजीनियर ने बताया- अंडरमाइनिंग से हुआ कटाव।कटाव की भयावह स्थिति के बीच देर रात घटनास्थल पर पहुंचे मंत्री, पीड़ितों की पीड़ा ने खींचा ध्यान।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा का जलस्तर घटने के बाद कटाव कहर बनकर टूटेगा, इसका अंदेशा होने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी लोगों के आक्रोश का कारण बन चुकी है। गंगा के जलस्तर में गिरावट के बाद शुरू हुए कटाव ने एक बार फिर बिहार सरकार के मंत्री ई. शैलेन्द्र को सोशल मीडिया के निशाने पर ला दिया है। भागलपुर में लौटती गंगा के कटाव से मची तबाही के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंत्री के पुराने बयान ‘बांध टूटा तो दे दूंगा इस्तीफा’ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बाढ़ की शुरुआत के समय उनके द्वारा कथित तौर पर दिए गए बयान को याद दिलाते हुए लोग उनसे सवाल पूछ रहे हैं।

इधर जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर जयप्रकाश पासवान के अनुसार, राघोपुर तटबंध पर अंडरमाइनिंग के कारण कटाव हुआ। जिस स्थान पर कटाव हुआ, वहां नदी की गहराई 40 से 45 फीट है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम करीब चार बजे ब्रह्म बाबा स्थान के पास कटाव शुरू हुआ था। नाव के सहारे कटाव स्थल पर जियो बैग डाले जा रहे थे, लेकिन कटाव की गति तेज होने के कारण बांध ध्वस्त हो गया।कटाव की ताजा घटनाओं के बाद मंत्री को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और उन्हें जमकर ट्रोल किया जा रहा है। कई लोग उनके पुराने बयान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए उनसे जल्द इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं।
कटाव की भयावह स्थिति के बीच मंत्री ई. शैलेन्द्र रात में घटनास्थल पर पहुंचे। आधी रात के बाद मंत्री बुलो मंडल भी पटना से पहुंचे। गंगा के रौद्र रूप और कटाव से प्रभावित लोगों की परेशानियों को देखकर हालात की गंभीरता साफ नजर आ रही थी। चारों ओर चिंता, भय और बेबसी का माहौल था। पुरुष, महिलाएं और बच्चे अपने घरों तथा सामान को बचाने की जद्दोजहद में लगे थे। प्रभावित परिवारों की चीख-पुकार और उनकी आंखों में दिखाई दे रही बेबसी ने पूरे घटनाक्रम को और भी मार्मिक बना दिया। जिन लोगों को सरकार और प्रशासन से ठोस राहत तथा सुरक्षा की उम्मीद थी, उनके लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कटाव से बचाव के लिए प्रभावी कदम कब उठाए जाएंगे। कटाव की तस्वीरों और प्रभावित लोगों की परेशानियों के बीच यह मुद्दा राजनीतिक बहस का रूप लेता दिखाई दे रहा है।सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बीच मंत्री के सामने अपनी बात स्पष्ट करने की चुनौती भी है। लोगों की अपेक्षा है कि वे अपने पुराने बयान के संदर्भ में स्थिति स्पष्ट करें और बताएं कि कटाव रोकने तथा प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
गंगा का कटाव केवल राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हजारों लोगों की सुरक्षा, आजीविका और भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है। गंगा के रौद्र रूप के सामने लोगों की बेबसी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बाढ़ और कटाव जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियां कितनी प्रभावी हैं।
फिलहाल, गंगा के कटाव से जूझ रहे लोगों को राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा ठोस कार्रवाई की जरूरत है। सोशल मीडिया पर मंत्री की आलोचना अपनी जगह है, लेकिन असली कसौटी यही होगी कि प्रभावित परिवारों को कितनी जल्दी राहत मिलती है और भविष्य में ऐसी तबाही रोकने के लिए क्या प्रभावी व्यवस्था की जाती है।
















