


पूर्णिया। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस बीच, कई विकसित देश भी ऊर्जा संकट से जूझते नजर आ रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री Narendra Modi के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने न केवल अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखा है, बल्कि आम नागरिकों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ने दिया। यह बातें शहर के सुप्रसिद्ध सर्जन और भाजपा नेता डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की सक्रिय ऊर्जा कूटनीति के कारण भारत ने अपने तेल आयात के स्रोतों में उल्लेखनीय विस्तार किया है। पहले जहां देश 27 देशों पर निर्भर था, वहीं अब 41 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात किया जा रहा है। रूस-यूक्रेन संकट के दौरान रियायती दरों पर तेल खरीदना भारत के राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने का उदाहरण रहा।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, तब केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में करीब 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर आम जनता को राहत दी। इसके साथ ही तेल कंपनियों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को भी सरकार ने स्वयं वहन किया, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर बनी रहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के संकटों से निपटने के लिए भारत ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को मजबूत किया है। वर्तमान में देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन का भंडार है, जिसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक करने की दिशा में काम चल रहा है। यह भंडारण क्षमता किसी भी आपात स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगी।
डॉ. गुप्ता ने प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन की सराहना करते हुए कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन एनर्जी और हाइड्रोजन मिशन जैसे कदमों से भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने देशवासियों से भी वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की दृढ़ इच्छाशक्ति और कुशल प्रबंधन के चलते आज भारत ऊर्जा सुरक्षा के मामले में विश्व के लिए एक मिसाल बन चुका है, जबकि अन्य देश महंगाई और संकट से जूझ रहे हैं।
















