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पूर्णिया। मंसूर आलम, बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और बरारी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के विधायक, का सोमवार शाम निधन हो गया। उन्होंने मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे लगभग 83 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही बरारी सहित पूरे सीमांचल क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

मंसूर आलम कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और बरारी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी तौकीर आलम के पिता थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचने लगे और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया।

मंसूर आलम का राजनीतिक जीवन लंबा, संघर्षपूर्ण और जनसेवा से परिपूर्ण रहा। उन्होंने वर्ष 1977 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर राजनीति में कदम रखा। हालांकि उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार जनसंपर्क में सक्रिय रहे।

वर्ष 1985 में उन्होंने लोकदल/दलित मजदूर किसान पार्टी के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने। इसके बाद 1995 में जनता दल के टिकट पर दूसरी बार और वर्ष 2000 में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के टिकट पर तीसरी बार बरारी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

अपने राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने बिहार सरकार में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के राज्यमंत्री तथा अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों का दायित्व संभाला। अपने कार्यकाल में वे जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने और क्षेत्र के विकास के लिए प्रयासरत रहने के लिए जाने जाते थे।

मंसूर आलम अपने सरल स्वभाव, सहज व्यवहार और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण आम लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे। वे सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और क्षेत्र के हर वर्ग के लोगों से उनका गहरा जुड़ाव था।

उनके निधन को क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है तथा दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की है।

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