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पूर्णिया : बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर शहर के प्रसिद्ध सर्जन एवं समाजसेवी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शराबबंदी केवल कानून नहीं बल्कि सामाजिक क्रांति है, जिसे राज्यहित में आगे भी जारी रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि 5 अप्रैल 2016 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लागू किया गया पूर्ण शराबबंदी का निर्णय बिहार के सामाजिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। इस फैसले ने समाज के आर्थिक एवं सामाजिक ढांचे में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।



डॉ. गुप्ता ने कहा कि शराबबंदी का सबसे बड़ा लाभ महिलाओं को मिला है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में घरेलू हिंसा की घटनाओं में कमी आई है तथा परिवारों में शांति और सम्मान का वातावरण बना है। स्वयं सहायता समूहों एवं सामाजिक संगठनों के अनुसार शराब के कारण होने वाले विवादों और प्रताड़ना में उल्लेखनीय कमी देखी गई है।

उन्होंने बताया कि शराबबंदी आर्थिक सुधार के रूप में भी सामने आई है। पहले कम आय वाले परिवारों की कमाई शराब में खर्च हो जाती थी, जबकि अब वही राशि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घर-परिवार की आवश्यकताओं पर खर्च हो रही है। इससे गरीब एवं मजदूर वर्ग की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और बचत की प्रवृत्ति बढ़ी है।



डॉ. गुप्ता ने कहा कि नशे में वाहन चलाने की घटनाओं में कमी आने से सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में भी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि कानून के क्रियान्वयन में समय-समय पर चुनौतियां सामने आई हैं, फिर भी इसके सामाजिक लाभों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि शराबबंदी ने समाज को स्वस्थ दिशा देने के साथ एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की नींव रखी है। राज्य के सर्वांगीण विकास और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित वातावरण देने के लिए इस निर्णय को पूरी मजबूती के साथ लागू रखना आवश्यक है।

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