


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। बाढ़ के दिनों में किनारों की ओर फैलने के बाद अब गंगा तेजी से अपनी मुख्य धारा की ओर लौटने लगी है। शनिवार को राघोपुर के तटीय इलाके में गंगा के लौटने की रफ्तार ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गई। नदी का जलस्तर भले ही नीचे जा रहा हो, लेकिन लौटती धारा की तेज रफ्तार अपने साथ तट की मिट्टी और किनारे की संरचनाओं को भी खींचने लगी है। राघोपुर के ब्रह्म बाबा स्थान में इसका असर जियो बैग की दीवार पर भी दिखाई देने लगा है।

ग्रामीणों के अनुसार, गंगा की मुख्य धारा की ओर वापसी के साथ ही तट पर कटाव की आशंका बढ़ गई है। फिलहाल नदी जियो बैग की दीवार के हिस्सों को अपने साथ बहाने लगी है। यही जियो बैग की दीवार उस समय राघोपुर के लिए सुरक्षा कवच बनी थी। ऐसे में अब उसी सुरक्षा व्यवस्था का नदी की तेज धारा की चपेट में आना ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है।
ग्रामीणों को सताने लगा पुराने कटाव का डर:
राघोपुर निवासी त्रिलोकी नाथ दिवाकर कहते हैं कि गंगा के लौटने का अपना अलग रूप होता है। उनके अनुसार, बाढ़ के समय नदी का फैलाव जितना चिंता पैदा करता है, उतना ही पानी उतरने के बाद मुख्य धारा में लौटती गंगा भी तटीय गांवों के लिए खतरा बन सकती है। लौटती धारा जब अपने रास्ते को तेज गति से पकड़ती है तो कई जगह किनारों पर कटाव शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि राघोपुर में इसकी शुरुआत दिखाई देने लगी है। जियो बैग का नदी की धारा में जाना आने वाले दिनों में तट पर दबाव बढ़ने का संकेत हो सकता है। इसलिए समय रहते संवेदनशील स्थानों की निगरानी और आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने की जरूरत है।
एक बार फिर कटाव की चुनौती:
राघोपुर के ग्रामीणों को आशंका है कि यदि गंगा की धारा इसी गति से मुख्य प्रवाह की ओर लौटती रही तो तटीय इलाकों में कटाव तेज हो सकता है। खासकर उन स्थानों पर खतरा अधिक हो सकता है जहां बाढ़ के दौरान पहले ही तट कमजोर हो चुका है या सुरक्षा संरचनाओं को नुकसान पहुंचा है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी के स्वभाव को देखते हुए केवल जलस्तर पर नजर रखना पर्याप्त नहीं होगा। पानी घटने के साथ धारा किस दिशा में जा रही है, किस स्थान पर उसका दबाव बढ़ रहा है और किन हिस्सों में मिट्टी खिसक रही है, इसकी भी लगातार निगरानी जरूरी है।
फिलहाल राघोपुर में गंगा का मुख्य धारा की ओर लौटना शुरू हो चुका है और उसके साथ जियो बैग के हिस्सों का बहना ग्रामीणों के लिए चेतावनी जैसा है। ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में नदी का रुख और कितना बदलता है तथा तट पर कटाव की स्थिति किस रूप में सामने आती है।

















