


पूर्णिया। विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर सहयोग संस्था के अध्यक्ष डॉ. अजीत प्रसाद सिंह के नेतृत्व में शनिवार को मलेरिया जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों को मौसमी महामारी मलेरिया से बचाव के उपायों और समय पर इलाज के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।
डॉ. अजीत प्रसाद सिंह ने बताया कि हर वर्ष 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास करना है।
उन्होंने जानकारी दी कि मलेरिया एक गंभीर संक्रामक रोग है, जो प्लास्मोडियम नामक परजीवी के कारण होता है और संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह परजीवी शरीर में प्रवेश कर लीवर और रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है, जिससे तेज बुखार सहित कई लक्षण उत्पन्न होते हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।
मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में ठंड लगकर तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, अत्यधिक पसीना, कमजोरी, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, भूख की कमी और खून की कमी शामिल हैं। गंभीर स्थिति में यह बीमारी किडनी, लीवर और मस्तिष्क को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने बताया कि मलेरिया की जांच रक्त परीक्षण के माध्यम से की जाती है, जिसमें ब्लड स्मीयर, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) और पीसीआर जांच प्रमुख हैं।
बचाव के उपायों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का उपयोग करें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और मच्छर भगाने वाले उत्पादों का इस्तेमाल करें। साथ ही खिड़कियों-दरवाजों पर जाली लगाना और साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है।
इलाज के संबंध में उन्होंने बताया कि मलेरिया का उपचार एंटी-मलेरियल दवाओं से किया जाता है, जो मरीज की स्थिति और परजीवी के प्रकार पर निर्भर करता है। उन्होंने बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लेने और पूरा दवा कोर्स करने की अपील की।
डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा मलेरिया उन्मूलन के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जहां मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है। लोगों से अपील की गई कि बुखार के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
उन्होंने बताया कि बिहार के गया, मुंगेर, जमुई, औरंगाबाद, नवादा, कैमूर और रोहतास जिले मलेरिया से अधिक प्रभावित हैं, वहीं पूर्णिया, कटिहार, अररिया और पश्चिमी चंपारण में भी इसके मामले सामने आते हैं।
कार्यक्रम के दौरान लोगों को जागरूक करते हुए स्वच्छता और सतर्कता अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।
















