
पूर्णिया : ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन और शहर को स्वच्छ, हरित एवं कचरामुक्त बनाने के उद्देश्य से शनिवार को जिला प्रेक्षागृह, पूर्णिया में जनप्रतिनिधियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी अंशुल कुमार, महापौर विभा कुमारी, डीआरडीए निदेशक अमरेंद्र कुमार, नगर आयुक्त कुमार अनिरुद्ध पांडे, डीडीसी राजीव कुमार, ओएसडी राजकुमार गुप्ता, उप महापौर पल्लवी गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने जनप्रतिनिधियों को ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और सुरक्षित निष्पादन की जानकारी दी। शहरी मंत्रालय के मेंटर एवं तकनीकी सलाहकार डॉ. संजय के. गुप्ता एवं उनकी टीम ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली-2026 के विभिन्न प्रावधानों को विस्तार से समझाया। बताया गया कि नियमावली एक अप्रैल 2026 से प्रभावी है और इसमें कचरे को स्रोत स्तर पर चार श्रेणियों में अलग करने तथा उसके वैज्ञानिक प्रसंस्करण एवं निष्पादन पर विशेष जोर दिया गया है। गीले कचरे से खाद एवं बायोगैस तैयार करने तथा प्लास्टिक, कांच और कागज जैसे सूखे कचरे को पुनर्चक्रण के लिए भेजने की जानकारी दी गई।
महापौर विभा कुमारी ने कहा कि नगर निगम का दायित्व केवल शहर की साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि कचरे का उचित एवं वैज्ञानिक निष्पादन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब तक कचरा एकत्र कर डंप करने पर अधिक जोर रहा है, लेकिन अब कचरे के बेहतर प्रबंधन और वैज्ञानिक निष्पादन की आवश्यकता है। स्वच्छता प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की भी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से प्रशिक्षण में मिली जानकारी को अपने-अपने वार्डों में लागू कराने और लोगों को कचरा अलग-अलग करने के लिए जागरूक करने की अपील की।

जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केवल नगर निकायों की जिम्मेदारी नहीं है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मियों और आम लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने नियमावली के अनुरूप कचरे का पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण और वैज्ञानिक निष्पादन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। जनप्रतिनिधियों से अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक कर स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा।
कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अलावा विकास एवं जनकल्याण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा हुई। आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक भवनों के कायाकल्प, जर्जर संरचनाओं के जीर्णोद्धार तथा आवश्यकता के अनुसार सरकारी परिसरों या विद्यालयों में आंगनबाड़ी केंद्रों को स्थानांतरित करने की योजना की जानकारी दी गई। जनप्रतिनिधियों से अपने क्षेत्र में कम से कम एक आंगनबाड़ी केंद्र के कायाकल्प की दिशा में पहल करने को कहा गया।
इसके अलावा सेवा संकल्प अभियान के तहत चयनित स्थलों के कायाकल्प, महिलाओं के लिए प्रमुख चौराहों पर शौचालय की व्यवस्था, पीएम सूर्य घर योजना के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा फुटकर विक्रेताओं को पीएम स्वनिधि योजना से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। नए परिसीमन, एमआरएफ साइट और कंपोस्ट प्लांट के चयन को लेकर भी जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में जिले के सभी नगर परिषद और नगर पंचायतों के मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद, नगर निगम के विभिन्न वार्डों के वार्ड पार्षद, कार्यपालक सहायक, बिजली विभाग सहित अन्य विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की सक्रिय भागीदारी से पूर्णिया के नगर निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाते हुए स्वच्छता के क्षेत्र में बेहतर उदाहरण स्थापित किया जा सकता है।












