


कहलगांव से शुरू हुई करीब 2100 किमी की आस्था की यात्रा, बैद्यनाथ, काशी विश्वनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन के बाद अंततः केदारनाथ के दरबार में झुकाया शीश
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। आस्था, संकल्प और भक्ति की अनोखी मिसाल पेश करते हुए कहलगांव के दो युवा श्रद्धालुओं अनुपम (28) और संदीप (26) ने करीब 2100 किलोमीटर की कठिन पैदल धार्मिक यात्रा पूरी कर केदारनाथ धाम में बाबा के दर्शन किए। अनुपम ने 5 जुलाई को और संदीप ने 27 जुलाई को कहलगांव से अपनी यात्रा शुरू की थी। दोनों ने एक ही दिन अपनी मंजिल हासिल की। अनुपम ने करीब 80 दिनों में कांवड़ के साथ यात्रा पूरी की, जबकि संदीप ने करीब 58 दिनों तक पैदल चलते हुए यह सफर तय किया।
अनुपम ने बताया कि गूगल पर इस यात्रा की दूरी काफी कम दिखाई गई थी, लेकिन धरातल पर वास्तविक दूरी उससे कई गुना अधिक निकली।
दोनों की यात्रा का तरीका अलग रहा। अनुपम ने कहलगांव की उत्तरवाहिनी गंगा से गंगाजल लेकर छह कलश कांवड़ में धारण किए और यात्रा पर निकल पड़े। वहीं, संदीप कहलगांव से पैदल सुल्तानगंज पहुंचे। वहां गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हुए और बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करने के बाद बिना कांवड़ के ही आगे की यात्रा जारी रखी।

यात्रा के दौरान दोनों अलग-अलग दिनों में देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचे। यहां बाबा के दर्शन किए। अनुपम ने गंगाजल से जलाभिषेक किया। इसके बाद दोनों की यात्रा काशी विश्वनाथ, बद्रीनाथ और अंततः केदारनाथ की ओर जारी रही।
रास्ते की कठिनाइयों और लंबी दूरी के बावजूद दोनों अपने संकल्प पर कायम रहे। यात्रा के दौरान पड़ने वाले कई प्रमुख शिवधामों में दर्शन और जलार्पण करते हुए वे लगातार आगे बढ़ते रहे। आखिरकार केदारनाथ धाम पहुंचकर दोनों ने भगवान केदार के दर्शन किए। लंबी और कठिन यात्रा के बाद धाम पहुंचना दोनों के लिए आस्था और संकल्प का यादगार क्षण रहा।
अनुपम ने बताया कि उनका लक्ष्य 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पूरी करना है। उनके अनुसार, अब तक तीन ज्योतिर्लिंगों और एक धाम की यात्रा पूरी हो चुकी है। शेष ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा वर्ष 2027 में पूरी करने का संकल्प है। दोनों श्रद्धालुओं ने देश में अमन-चैन, सरहद पर तैनात वीर जवानों और युवाओं के लिए भी मन्नत मांगी।
कहलगांव की उत्तरवाहिनी गंगा से शुरू हुई यह यात्रा श्रद्धा, धैर्य और संकल्प की प्रेरक कहानी बन गई। बैद्यनाथ, काशी विश्वनाथ और बद्रीनाथ जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन करते हुए दोनों श्रद्धालु अंततः केदारनाथ के दरबार तक पहुंचे।

















