5
(2)

@ पांचवीं ‘मंजूषा हटिया’ में 20 हजार से अधिक की कलाकृतियां बिकीं, बाढ़ राहत शिविर के बच्चों की कला बनी आकर्षण का केंद्र।

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। अंग प्रदेश की लोक परंपरा और भागलपुर की पहचान से जुड़ी मंजूषा कला मंगलवार को भागलपुर संग्रहालय परिसर में न केवल प्रदर्शित हुई, बल्कि उसने बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी भी दर्ज कराई। पांचवीं ‘मंजूषा हटिया सह लोक कला प्रदर्शनी’ में स्थानीय कलाकारों की कलाकृतियों एवं हस्तनिर्मित उत्पादों की 20 हजार रुपये से अधिक की बिक्री हुई।
कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार, जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय, भागलपुर तथा भागलपुर संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस मंजूषा हटिया का उद्घाटन जिला पदाधिकारी अलंकृता पाण्डेय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस मौके पर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन सहित वरिष्ठ एवं युवा मंजूषा कलाकार, कला प्रेमी, स्थानीय नागरिक और बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे।

CREATOR: gd-jpeg v1.0 (using IJG JPEG v62), default quality?

परंपरा से आधुनिक बाजार तक पहुंची मंजूषा:
इस बार मंजूषा हटिया में पारंपरिक कलाकृतियों के साथ कलाकारों के नए प्रयोग भी आकर्षण का केंद्र रहे। मंजूषा टी-शर्ट, स्क्रीन प्रिंटिंग से तैयार कपड़े, जूट क्राफ्ट, साड़ी, दुपट्टे, रुमाल, बैग, शो-पीस और सजावटी पंखों सहित कई उपयोगी एवं सजावटी उत्पादों ने लोगों का ध्यान खींचा। बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी पसंद के उत्पाद खरीदे। आयोजन ने यह संकेत भी दिया कि मंजूषा कला को यदि आधुनिक उपयोग की वस्तुओं से जोड़ा जाए तो इसके लिए नए बाजार और ग्राहकों की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

राहत शिविर के बच्चों की कला ने जीता दिल:

मंजूषा हटिया का सबसे भावुक और प्रेरक आकर्षण बाढ़ राहत शिविर में रहने वाले बच्चों द्वारा बनाई गई मंजूषा कलाकृतियां रहीं। राहत शिविर में आयोजित कला गतिविधियों के दौरान इन बच्चों ने मंजूषा के माध्यम से अपनी रचनात्मकता को आकार दिया था।जिला पदाधिकारी अलंकृता पाण्डेय ने बच्चों द्वारा तैयार एक मंजूषा कलाकृति स्वयं खरीदकर उनका उत्साह बढ़ाया।
‘कला केवल प्रदर्शनी तक सीमित न रहे’:
जिला पदाधिकारी अलंकृता पाण्डेय ने मंजूषा हटिया की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय कला और कलाकारों को सीधे बाजार से जोड़ने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि कला केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि कलाकारों को उनके उत्पादों का उचित बाजार और व्यापक ग्राहक वर्ग मिलना चाहिए।उन्होंने डिजिटल मार्केट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से मंजूषा कलाकारों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

35 कलाकारों को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित:

इस अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के तहत टाउन हॉल में नाटक की प्रस्तुति देने वाले 35 कलाकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने कलाकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। वहीं पांचवीं मंजूषा हटिया के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कुमारी श्वेता, वरिष्ठ मंजूषा कलाकार एवं संयोजक तथा सुरभि सुमन, युवा मंजूषा कलाकार एवं संयोजक को भी सम्मानित किया गया।

Aapko Yah News Kaise Laga.

Click on a star to rate it!

Average rating 5 / 5. Vote count: 2

No votes so far! Be the first to rate this post.

Share: