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संवेदकों ने जिला पदाधिकारी से की मुलाकात, निगम परिसर में संविधान की प्रति लेकर धरना; तकनीकी मूल्यांकन और प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पूर्णिया। नगर निगम पूर्णिया की निविदा आमंत्रण सूचना संख्या 02/2026-27 को लेकर संवेदकों का विरोध लगातार जारी है। संवेदकों ने निविदा की वैधता अवधि समाप्त होने, मामला उच्च न्यायालय में लंबित रहने तथा न्यायालयीय प्रक्रिया के बीच निविदा निष्पादन की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने का आरोप लगाते हुए विरोध जताया है।

इसी क्रम में संवेदकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को जिला पदाधिकारी, पूर्णिया से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी और निविदा को निरस्त करने की मांग रखी। इसके बाद गुरुवार को संवेदक नगर निगम परिसर में संविधान की प्रति लेकर धरने पर बैठे। संवेदकों ने माथे और बांह पर काली पट्टी बांधकर नियमावली और संवैधानिक प्रक्रिया की रक्षा की मांग की।

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संवेदकों ने कहा कि नगर निगम की महापौर एवं संवैधानिक प्रमुख विभा कुमारी तथा जिला पदाधिकारी, पूर्णिया की पहल और हस्तक्षेप से निविदा को निरस्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। संवेदकों ने इसके लिए महापौर और जिला पदाधिकारी के प्रति आभार जताया तथा कहा कि संवैधानिक और नियमसम्मत प्रक्रिया की रक्षा में उनके योगदान को संवेदक समुदाय याद रखेगा।

तकनीकी मूल्यांकन पर उठाए सवाल

संवेदकों ने निविदा की तुलनात्मक विवरणी के तकनीकी मूल्यांकन और उसकी स्वीकृति की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अधीक्षण अभियंता, नगर विकास विभाग, पूर्णिया अंचल तथा उसी अंचल में पदस्थापित एक सहायक अभियंता द्वारा निर्धारित नियमावली और प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। संवेदकों का दावा है कि तकनीकी मूल्यांकन में मनमाने तरीके से कुछ संवेदकों को सफल और अन्य को असफल घोषित किया गया।

विशेष सतर्कता इकाई से जांच की मांग

संवेदकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच विशेष सतर्कता इकाई से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नगर निगम की महापौर को भी संबंधित सक्षम अधिकारियों से पत्राचार कर पूरे मामले की जांच सुनिश्चित कराने की पहल करनी चाहिए।

संवेदकों ने बताया कि इस मामले को लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव, बिहार के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तथा विशेष सतर्कता इकाई के सक्षम पदाधिकारियों को लिखित शिकायत देने का निर्णय लिया गया है। शिकायत के साथ उपलब्ध दस्तावेज और साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई है।

अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की मांग

संवेदकों ने कहा कि यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता या नियमविरुद्ध कार्य प्रमाणित होता है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की जाएगी। उनका कहना है कि उपलब्ध दस्तावेज और साक्ष्यों को सक्षम प्राधिकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक भी किया जाएगा।

संपत्ति की जांच की भी मांग

संवेदकों ने संबंधित अधिकारियों की संपत्ति की जांच कराने की मांग भी उठाई है। उनका आरोप है कि पद के दुरुपयोग के माध्यम से आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने की आशंका है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम तथ्य जांच के बाद ही स्पष्ट होने की बात भी संवेदकों ने कही। संवेदकों ने कहा कि संपत्ति से जुड़े आरोपों को लेकर भी सक्षम प्राधिकार के समक्ष शपथपत्र के माध्यम से शिकायत करने की तैयारी की जा रही है।

कथित बिचौलिए की भूमिका की जांच की मांग

संवेदकों ने पूर्णिया अंचल में एक कथित बिचौलिए की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। संवेदकों का दावा है कि उक्त व्यक्ति के माध्यम से कथित अवैध वसूली किए जाने की सूचना उन्हें मिली है। साथ ही आरोप लगाया गया कि उक्त व्यक्ति कार्यालय से संबंधित कागजात प्राप्त करने का कार्य भी करता है। संवेदकों ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है और कहा कि संबंधित व्यक्ति के बारे में जानकारी जल्द सक्षम अधिकारियों के समक्ष रखी जाएगी।

नियम और पारदर्शिता की रक्षा के लिए संघर्ष का दावा

संवेदकों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि नियमावली, पारदर्शिता, निष्पक्षता और संवैधानिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए है। उन्होंने सरकार और सक्षम अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की।

धरना एवं प्रतिनिधिमंडल में रजनीश कुमार सिंह, विकास मंडल, डॉ. आलोक राज, रवि शंकर सिंह, अब्दुल कलाम आजाद, सुनील कुमार यादव, गौरव कुमार, गौरव गौतम सिंह, सुजीत सिंह, मुकेश कुमार, राहुल सिंह, आदित्य कुमार सिंह, कन्हैया कुमार झा, रवि रंजन राज, रजत आदित्य, गुप्तेश कुमार, दिलजीत कुमार गौतम सहित अन्य संवेदक मौजूद रहे।

संवेदकों द्वारा लगाए गए तकनीकी मूल्यांकन, कथित अनियमितता, अवैध वसूली और संपत्ति से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। संवेदकों ने संबंधित दस्तावेज सक्षम प्राधिकार के समक्ष प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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