
@ पीबीएस कॉलेज के करीब 600 समेत विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के लगभग 3,000 छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में परीक्षा से जुड़े गंभीर प्रकरण को लेकर गुरुवार को छात्रों ने छात्र महा आंदोलन के तहत धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान छात्रों ने प्रभावित विद्यार्थियों की परीक्षा जल्द कराने और उनके शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने की मांग उठाई। छात्रों का कहना है कि मामला केवल पीबीएस कॉलेज के करीब 600 विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के लगभग 3,000 छात्रों के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ा है।

आंदोलन के दौरान विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक स्वयं छात्रों के बीच पहुंचे। इसके बाद छात्रों का छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल परीक्षा नियंत्रक से मिला। इस दौरान छात्रों और परीक्षा नियंत्रक के बीच समस्या के समाधान को लेकर तीखी बहस और सवाल-जवाब हुए। छात्रों ने प्रभावित सभी विद्यार्थियों की परीक्षा जल्द आयोजित कराने की मांग रखी। मौके पर पीबीएस कॉलेज के प्राचार्य सुधीर कुमार सिंह तथा तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर डॉ. मुकेश सिंह भी मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी में छात्रों ने परीक्षा से संबंधित अपनी समस्याओं, आपत्तियों और मांगों को विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष रखा।
लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन में आया महत्वपूर्ण मोड़:
लगातार बातचीत और छात्रों के दबाव के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 8 अक्टूबर 2026 को लिखित सूचना जारी की गई। विश्वविद्यालय की ओर से जारी सूचना के अनुसार संबंधित छात्रों के लिए नियमानुकूल विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी और इसे अधिकतम 31 दिसंबर 2026 तक करा लिया जाएगा।सूचना में यह भी कहा गया है कि संबंधित छात्र आगामी परीक्षाओं के लिए परीक्षा प्रपत्र भरते समय Basket के अनुरूप विषय का चयन करेंगे। आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के बाद संबंधित विद्यार्थियों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी।
परीक्षा नियंत्रक के इस्तीफे की भी उठी मांग:
आंदोलन के दौरान छात्रों ने पूरे प्रकरण में जवाबदेही तय करने के साथ-साथ विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक के इस्तीफे की मांग भी की। हालांकि, परीक्षा नियंत्रक ने इस्तीफा नहीं दिया।छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से विशेष परीक्षा कराने का लिखित निर्णय आंदोलन के बाद सामने आया है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर परीक्षा आयोजित कराकर छात्रों की आगे की शैक्षणिक प्रक्रिया को सुचारू रूप से सुनिश्चित करे।
3,000 छात्रों के भविष्य का मामला:

छात्रों ने कहा कि यह समस्या केवल पीबीएस कॉलेज के करीब 600 छात्रों तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ने वाले लगभग 3,000 विद्यार्थी इससे प्रभावित हैं। ऐसे में विशेष परीक्षा का आयोजन केवल एक कॉलेज की समस्या का समाधान नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में छात्रों के शैक्षणिक भविष्य और उनके अधिकारों से जुड़ा विषय है। छात्र महा आंदोलन में आलोक यादव के नेतृत्व में सोनू कुमार निगम, प्रियांशु यादव, सत्यम वर्मा, आदित्य शेखर, प्रवीण कुशवाहा सहित अन्य छात्र मौजूद रहे।















