
माउंट आबू से पहुंचे राजयोगी डॉ. बनारसी भाई ने नशे के दुष्परिणामों से कराया अवगत, उपस्थित लोगों ने नशामुक्त समाज बनाने की ली शपथ
पूर्णिया। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की पूर्णिया शाखा के प्रभात कॉलोनी स्थित सभागार में सोमवार को बीके मुकुट मणि के नेतृत्व में “नशामुक्त बिहार” अभियान एवं “चिकित्सकों का स्नेह मिलन” कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संस्था के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू, राजस्थान से पहुंचे राजयोगी ब्रह्माकुमार डॉ. बनारसी भाई विशेष रूप से उपस्थित रहे। वे ब्रह्माकुमारीज के चिकित्सा प्रभाग के अध्यक्ष हैं। कार्यक्रम में शहर के कई चिकित्सकों एवं गणमान्य लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 8:30 बजे हुआ। अतिथियों का स्वागत प्रो. अनीता एवं बीके संजय ने किया। स्वागत भाषण बीके मुकुट मणि ने दिया, जबकि मंच संचालन बीके मनोज ने किया।
नशा व्यक्ति ही नहीं, पूरे परिवार और भविष्य को करता है प्रभावित
अपने संबोधन में डॉ. बनारसी भाई ने नशे के दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि नशा करने वाला व्यक्ति यह सोचता है कि वह केवल एक सिगरेट, एक घूंट या एक पुड़िया का सेवन कर रहा है, जबकि वास्तव में वह अपने परिवार की खुशियों और अपने भविष्य को नुकसान पहुंचा रहा होता है।
उन्होंने बताया कि नशा तीन स्तरों पर नुकसान पहुंचाता है। पहला नुकसान शरीर को होता है। धूम्रपान से फेफड़े प्रभावित होते हैं, शराब के सेवन से यकृत को नुकसान पहुंचता है और हृदय की कार्यक्षमता पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। गुटखा और तंबाकू का सेवन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है।
दूसरा नुकसान परिवार को होता है। नशे की आदत के कारण घर का वातावरण तनावपूर्ण हो जाता है। शराब के नशे में घर लौटने वाले व्यक्ति के व्यवहार से बच्चे भयभीत होते हैं और परिवार के अन्य सदस्यों को मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती है।

तीसरा नुकसान व्यक्ति के भविष्य और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। नशे की आदत धीरे-धीरे आर्थिक संसाधनों को समाप्त कर देती है। उन्होंने कहा कि नशा सुकून नहीं, बल्कि परेशानी और आर्थिक तंगी देता है। कुछ समय का कथित आनंद जीवनभर के दुख का कारण बन सकता है।
नशे से मुक्ति के लिए अपनाएं सकारात्मक जीवनशैली
डॉ. बनारसी भाई ने नशे से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय भी बताए। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे के लिए प्रेरित किए जाने पर दृढ़ता से मना करना सीखना चाहिए। अच्छी संगति अपनानी चाहिए, क्योंकि गलत संगति व्यक्ति को नशे की ओर ले जाती है, जबकि अच्छे मित्र जीवन में लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने युवाओं को खेलकूद, व्यायाम, पुस्तक अध्ययन और रचनात्मक गतिविधियों में समय लगाने की सलाह दी। साथ ही राजयोग मेडिटेशन के नियमित अभ्यास से मन को सशक्त बनाने और आत्मनियंत्रण विकसित करने पर जोर दिया।
एक युवा पूरे नशे को हरा सकता है : बीके मुकुट मणि
बीके मुकुट मणि ने अपने संबोधन में कहा कि जिस प्रकार एक दीपक पूरे अंधकार को दूर करने की क्षमता रखता है, उसी प्रकार एक जागरूक युवा समाज में नशे के विरुद्ध बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि न स्वयं नशा करें और न ही दूसरों को इसके लिए प्रेरित होने दें। नशा छोड़ने और जीवन को बेहतर बनाने का संकल्प ही स्वस्थ समाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने प्रतिज्ञा की कि वे स्वयं जीवन में कभी नशा नहीं करेंगे और नशा करने वालों को इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही समाज में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
चिकित्सकों ने पहल की सराहना की
कार्यक्रम में डॉ. अंगद, डॉ. शैलेन्द्र, डॉ. अरविंद, डॉ. आशुतोष, डॉ. आभा, डॉ. अंजु, डॉ. दिनेश और डॉ. बी.एन. मिश्रा सहित कई चिकित्सक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने इस प्रकार के आयोजन की सराहना करते हुए समाज में नशामुक्ति के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने डॉ. बनारसी भाई के विचारों और प्रेरणा को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज को जागरूक करने की बात कही।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में बीके मधु, ईसा, दीपा और जागृति ने सहयोग किया। अंत में आयोजकों की ओर से सभी अतिथियों एवं उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।















