
@ सूर्य आराधना, पारंपरिक गीत और पूजा की झलकियों से बच्चों ने सजाया छठ का संसार, लोक संस्कृति की जीवंत पाठशाला बना स्कूल परिसर।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कहीं छठी मइया के पारंपरिक गीतों की गूंज, कहीं सूप-दउरा और पूजा की परंपराओं की झलक, तो कहीं उगते सूर्य को अर्घ्य देने की मनमोहक प्रस्तुति। नजारा किसी छठ घाट का नहीं, बल्कि प्राथमिक विद्यालय रामराय बाग खुटहरी के परिसर का था। यहां नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपनी प्रस्तुति से ऐसा माहौल बनाया कि विद्यालय परिसर छठ की लोक आस्था और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हो उठा।
जिले के कहलगांव प्रखंड के इस विद्यालय में बच्चों ने छठ महापर्व को केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि अपनी परंपरा से जुड़ने के उत्सव के रूप में मनाया। पारंपरिक छठ पूजा की झांकी प्रस्तुत कर बच्चों ने बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति की खूबसूरत तस्वीर पेश की। बच्चों की मासूम आवाज में जब ‘उगअ हो सुरूज’ और ‘मारबउ रे सुगबा धनुष से’ जैसे पारंपरिक गीत गूंजे तो पूरा वातावरण छठमय हो गया। वहीं ‘रूनकी-झूनकी बेटी मांगीला, पढ़ल पंडितवा दामाद’ गीत ने लोक परंपरा और पारिवारिक आकांक्षाओं की मिठास घोल दी।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि बच्चों ने छठ पर्व को किताबों के पन्नों से बाहर निकालकर उसके रीति-रिवाज, गीत-संगीत और सामाजिक महत्व को व्यवहारिक रूप में समझने का प्रयास किया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत को जानना भी उतना ही जरूरी है।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधान शिक्षक सर्वोत्तम कुमार, वरीय शिक्षक रतन कुमार, कल्पना कुमारी, मधुप्रिया कुमारी, उज्ज्वला कुमारी, गीता कुमारी सहित विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं और ग्रामीण महिलाएं मौजूद रहीं।















