
दीपावली, धनतेरस एवं छठ पूजा के पावन अवसर पर सप्तम से दशम कक्षा तक के विद्यार्थियों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग, भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान का दिया संदेश
नवगछिया। दीपावली, धनतेरस एवं छठ पूजा के पावन अवसर पर बाल भारती, पोस्ट ऑफिस रोड, नवगछिया परिसर में भव्य स्वस्तिक समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सप्तम, अष्टम, नवम एवं दशम कक्षा के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ नृत्य एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति, परंपरा, धार्मिक आस्था एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता उत्पन्न करना तथा उनके मन में अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना था।

समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने स्वस्तिक के शुभ एवं कलात्मक स्वरूप को प्रस्तुत करते हुए भारतीय संस्कृति में इसके धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाया। विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रस्तुतियों, रंग-बिरंगी सजावट एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता से विद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल बना रहा।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को बताया गया कि स्वस्तिक भारतीय संस्कृति में मंगल, समृद्धि, सुख, शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। दीपावली प्रकाश, खुशियों एवं बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देती है, धनतेरस सुख-समृद्धि एवं आरोग्य की कामना का पर्व है, जबकि छठ पूजा प्रकृति, सूर्योपासना, लोक आस्था एवं पर्यावरण संरक्षण का अनुपम उदाहरण है।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य कौशल किशोर जायसवाल एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे विद्यार्थियों में रचनात्मकता, सहयोग, अनुशासन, आत्मविश्वास तथा अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन समिति के सचिव अभय प्रकाश मुनका ने समारोह में शामिल सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी के सहयोग एवं योगदान के लिए धन्यवाद दिया तथा विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता की सराहना की।

समारोह भारतीय संस्कृति की विविधता, एकता, परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश देते हुए हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।















