


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर शुक्रवार को जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धा व भक्तिभाव का माहौल रहा। घरों, मंदिरों और पूजा स्थलों पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और आरोग्य की कामना की। पूजा स्थलों पर मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और भगवान अनंत के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

कहलगांव क्षेत्र के पश्चिम टोला एकचारी-भोलसर स्थित मां शारदे क्लब की ओर से चांदनी चौक स्थित कीर्तन पंडाल में सामूहिक अनंत पूजा एवं कथा का आयोजन किया गया। इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने श्रद्धापूर्वक भगवान अनंत की कथा सुनी।
पूजा के दौरान कच्चे सूत से बने 14 गांठ वाले अनंत सूत्र की विधि-विधान से पूजा की गई। पूजा और कथा के बाद पुरुष श्रद्धालुओं ने दाहिनी तथा महिलाओं ने बाईं भुजा पर अनंत सूत्र धारण किया। इसके बाद प्रसाद का वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान अनंत से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की।
14 गांठ वाले अनंत सूत्र का विशेष महत्व:
व्रती उपेंद्र नारायण सिंह ने बताया कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार 14 वर्षों तक श्रद्धा और नियमपूर्वक अनंत भगवान का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। अनंत सूत्र की 14 गांठों को 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है।सामूहिक पूजा के दौरान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान कराया। दूध-दही से बने क्षीरसागर में कुश से निर्मित अनंत भगवान की पूजा की गई। मंत्रोच्चार और शंखध्वनि से पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा।
पांडवों से जुड़ी है अनंत व्रत की कथा:
धार्मिक मान्यता के अनुसार अनंत चतुर्दशी की कथा महाभारत काल से जुड़ी है। वनवास के दौरान पांडवों को भगवान श्रीकृष्ण ने अनंत भगवान की पूजा और व्रत करने की सलाह दी थी। पांडवों द्वारा श्रद्धापूर्वक पूजा किए जाने के बाद उनके कष्ट दूर होने और खोया वैभव वापस मिलने की मान्यता है। ‘ॐ अनंताय नमः’ और ‘भगवान अनंत की जय’ के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान अनंत के चरणों में श्रद्धा अर्पित कर परिवार और समाज की खुशहाली की कामना की।

















