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प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ‘बेचारा’ वाले बयान पर जनसुराज के सूत्रधार और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने करारा पलटवार किया है। भागलपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें ‘बेचारा’ कहा है, तो पहली बार वह मुख्यमंत्री की किसी बात से सहमत हैं।
प्रशांत किशोर ने ‘बेचारा’ शब्द का अर्थ समझाते हुए कहा कि जिसका कोई चारा न हो, वही बेचारा है। उन्होंने कहा कि उनके साथ-साथ जनसुराज के कार्यकर्ताओं के पास भी अब कोई दूसरा रास्ता नहीं है। ‘बिहार को अनपढ़ और अपराधियों के हाथों में छोड़कर नहीं जा सकते। बिहार को सुधारने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं है।’
मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए प्रशांत किशोर ने उन्हें भाजपा का ‘अनपढ़ और अपराधी मुख्यमंत्री’ करार दिया। उन्होंने कहा कि बिहार को ऐसे लोगों के हाथों में नहीं सौंपा जा सकता। उनके मुताबिक शिक्षा, रोजगार और बदलाव को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस का केंद्र बदल रहा है।
‘JDU को अमित शाह चला रहे हैं’:
प्रशांत किशोर ने JDU के नाम को लेकर चल रही सियासी चर्चा पर भी निशाना साधा। संजय झा के ‘जनता दल नीतीश’ नाम के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने दावा किया कि पार्टी का नाम जनता दल यूनाइटेड हो या जनता दल नीतीश, उसे चलाने वाले अमित शाह ही हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अब JDU नहीं चला रहे हैं और पार्टी के फैसलों को लेकर अमित शाह की भूमिका है। हालांकि, ये प्रशांत किशोर के राजनीतिक आरोप हैं।

‘बिहार का नरेटिव बदल चुका है’:
विधान परिषद चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में भागलपुर पहुंचे प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार का राजनीतिक नरेटिव पहले ही बदल चुका है। उन्होंने दावा किया कि 2025 में सरकार ने नरेटिव बदलने के लिए 10-10 हजार रुपये में वोट खरीदे।
उनके अनुसार अब बिहार में शिक्षा, बदलाव और रोजगार बड़ा मुद्दा बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के बाद भाजपा ने कुछ महीनों तक शिक्षा और रोजगार की बहस को पीछे धकेलकर एनकाउंटर, जाति और हत्या जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया।
प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर में भाजपा को हराने के बाद जनसुराज ने एक बार फिर राजनीतिक बहस को शिक्षा और रोजगार की ओर मोड़ा है। उनका दावा है कि आने वाले समय में विधायक किसी भी दल का हो, जनता का सबसे बड़ा सवाल यही होगा – बिहार में शिक्षा और रोजगार कौन देगा?
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का मुख्य एजेंडा शिक्षा और रोजगार ही रहने वाला है।

















