


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गांव की चौखट से निकलकर महिलाओं ने अब रोजगार और कारोबार की कमान संभाल ली है। पशुपालन, सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, किराना और कृषि आधारित गतिविधियों के जरिए महिलाएं न सिर्फ परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि आर्थिक फैसलों में भी अपनी भूमिका मजबूत कर रही हैं।

भागलपुर में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 85 हजार से अधिक जीविका दीदियां लखपति दीदी बन चुकी हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले ने निर्धारित लक्ष्य भी हासिल कर लिया। जीविका के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

समूह से नेतृत्व तक पहुंचीं मानुषी:
सबौर प्रखंड के बड़ी इब्राहिमपुर की मानुषी देवी करीब एक दशक पहले राधिका जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। सक्रियता के चलते उन्हें समूह का अध्यक्ष चुना गया। बाद में वह चिराग जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ की अध्यक्ष बनीं।
वर्तमान में वह करीब सात हजार महिलाओं के साथ काम कर रही हैं। उनके संकुल संघ की ओर से जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ‘दीदी की रसोई’ संचालित की जा रही है, जिससे कई महिलाओं को रोजगार मिला है। मानुषी बिहार राज्य जीविका निधि सहकारी साख समिति लिमिटेड के निदेशक मंडल की सदस्य भी बनी हैं।
तैराकी सिखाकर आत्मनिर्भर बन रहीं कुंदन:
कहलगांव की भविष्य जीविका महिला संकुल संघ की अध्यक्ष कुंदन देवी की कहानी भी बदलाव की मिसाल है। विष्णु जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने आर्थिक गतिविधियों के साथ नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली। बचपन से तैराकी में दक्ष कुंदन अब एनटीपीसी के स्विमिंग सेंटर में महिलाओं और लड़कियों को प्रशिक्षण देती हैं। इसके अलावा वह सिलाई का काम करती हैं और नाश्ते की दुकान भी चलाती हैं, जिसका संचालन उनका बेटा करता है।
अब आमदनी को स्थायी बनाने की चुनौती:
लखपति दीदी बनने के बाद महिलाओं की आय को लंबे समय तक बनाए रखना अगली चुनौती है। इसके लिए उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, बाजार और डिजिटल बिक्री पर ज्यादा जोर देने की जरूरत है। इससे छोटे उद्यमों को स्थायी कारोबार में बदला जा सकेगा।
जीविका भागलपुर के डीपीएम सुरनिमल गेरेन के अनुसार, पहल का उद्देश्य महिलाओं को परिवार की आय में हिस्सेदार बनाने के साथ उन्हें आर्थिक निर्णयों की भागीदार बनाना है। भागलपुर में 85 हजार से अधिक महिलाओं का लखपति दीदी बनना इसी बदलाव का संकेत है।
















